जमाना अब तो बदला है कहाँ अब कोई दूरी है बेटा और बेटी- दोनों का, होना जरूरी है बिना इनके ना जिन्दगी, ना जिन्दगी हाँ जिन्दगी अधूरी है ।। बेटी की थाली में,ना राखी हो […]
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जमाना अब तो बदला है कहाँ अब कोई दूरी है बेटा और बेटी- दोनों का, होना जरूरी है बिना इनके ना जिन्दगी, ना जिन्दगी हाँ जिन्दगी अधूरी है ।। बेटी की थाली में,ना राखी हो […]
जिसको बोल कर, मन हो जाए प्रसन्न , ऐसी मेरी यह भाषा है । भाव को मेरे बना दे दर्पण , करती है शब्दों का समर्पण , ऐसी मेरी यह भाषा है। जैसा चाहूं वो […]
हमको गैरों से भी मोहब्बत है, अकेला तुमसे होता,तो मर जाते। घर से दूर हैं घर के वास्ते, वरना हम भी सोचते हैं ,काश घर जाते। हम खड़े हैं हमने माज़ी से सबक लिया, वक़्त […]
सूना जाए राखी का त्यौहार, राखी भेजी है, डाक से इस बार ना भैया मिलें, ना भाभी मिलें, ना मिले मां पापा का प्यार। ना भतीजी, भतीजे के मुख पे खुशियां मै देखूं, ना कर […]
रोज मिलने के वादे तोड़ते हो जो तुम बात तेरी ये मुझको गवारा नहीं। बात ही बात पे रूठते हो जो तुम जानते हो तेरे बिन गुजारा नहीं। रोज अपनी गली देखते हो मुझे आशिक […]
टूटते क्यों नहीं सत्ता के पाषाण ह्रदय तटबंध उन आँसुओं के सैलाब से जो बहते है गुमसुम बच्चों की खाली थाली देखकर जब चीख उठते हैं पैरों के बड़े बड़े लहूलुहान चीरे फटे कंधे साहस […]
पार्थ! तुम भटक रहे हो क्या? उस धर्म के मार्ग से जिस मार्ग का अनुसरण करने का पाठ आप पढ़ाते रहे हैं वनवास के समय अपने प्रवचनों में … वो रण वांकुरे, जिन्होंने तुम्हारा वनवास […]
केवल धागे की रीत न हो असली का रक्षाबंधन हो जब बंधे कलाई पर राखी सच्ची रक्षा संकल्पित हो। पावन धागा जब बहन बांधती है भाई के हाथों में, रक्षा की जिम्मेदारी आ जाती है […]
दूरियां कितनी भी हों मिटाता चला जाऊंगा तेरे दिल में कितनी भी कड़वाहट हो मैं अपने व्यवहार से तेरे दिल में जगह बनाऊंगा तू कितनी भी कोशिश कर ले तुझे भी हो जाएगा मेरी वफाओं […]
सिसकते जज्बात हँसने लगे तुम्हें देखकर न जाने ऐसा क्या था तुममें! जो मेरी बिखरी जिंदगी को तुमने दो पल में ही समेट लिया। और ऐसा समेटा कि मैं कभी फिर बिखर ना सका। टूटा […]
जहां गंगा पवित्र है , वही पवित्र तो नाला भी होता था कभी, अगर गंगा पाप धोती है ! तो नाला पापों को समेटता है अपने में। पर नाले को कौन पूजेगा, पर कभी नाला […]
कुछ इधर से खाया कुछ उधर से मोटे पेट हो गए रात भर नकली नोट छापे सुबह सेठ हो गए
हुक्के सी हैं लत्त तुम्हारी, लगी जो ; हम से छुट्टे ना । और रेशम-सा हैं विश्वास हमारा कभी जो तुमसे टूटे ना ।………
1: रक्षाबंधन रक्षासूत्र सिर्फ एक धागा नहीं, अटूट स्नेह प्यार विश्वास समर्पण का व्यवहार । रक्षाबंधन भाई बहन के अटूट स्नेह का त्यौहार ।। भरोसा उस विश्वास का भाई हरहाल में रहेगा बनकर ढाल विश्वास […]
कितना अच्छा होता! अगर ऐसे ही हमारे नाम भी अलग होते , और काम भी अलग-अलग होते , मगर, जात और धर्म एक ही होती, इंसानियत।
आपदाओं का शिलशिला —————————- त्रासदी का जालीम कहर कब तक डराएगा वक्त का यह खौफजदा दौङ थम ही जाएगा । अबतक के अनुभवों से हमने सीखा है आपदाओ का शिलशिला जब चलने लगता है धैर्य […]
माँ: जीवन की पहली शिक्षिका ******************** जीवन की पहली गुरु, मार्गदर्शिका कहाती है हर एक सीख,सहज लब्जों में सिखाती है ।। धरा पे आँखे खुली,माँ से हुआ सामना जन्मों जन्म से अधूरी,पूर्ण हुई कामना घर […]
तुम तो हो फ़ाजिल मनुज हम कहे जाते पिशुन हैं गिरे निर्वास गुल, क्यों उठाकर सूँघते हो। वह प्रभा जिससे तुम्हें अनुरक्ति हमसे हो गई, असलियत वो है नहीं केवल दिखावा है हमारा, वास्तविकता में […]
तुमसे ही लिखना सीखा है तुमसे से ही कहना सीखा है, जो बात उगी भीतर के मन में उसको ही कहना सीखा है। सच्चाई तो सच्चाई है सच पर ही चलना सीखा है, झूठ से […]
“मित्र” वो मेरा सगा नहीं है , मगर भाई से बढ़कर है। कोमिडन नहीं है, मगर हंसाता है; कार्टून से बढ़कर है। थोड़ा जिदी है, मगर इतराता नहीं है। बेपरवाह है खुद के लिए, पर […]
ना गम है ना दर्द है जो बिताया दोस्तों के साथ वो ही सुनहरा वक्त है ना है कोई खून का रिश्ता फिर भी निभाते ये दिलवाले है एक दूसरे में खुश रहते ये मस्त […]
आजकल वफ़ा और कदर सोने के भाव है, मगर धोखा यहां पुलिस की तरह , हर चौराहे पर मिलता है।
आओ कवितायें करते हैं मीठी-मीठी, प्यारी प्यारी श्रृंगार भरी, मनुहार भरी दिल में उगते नव प्यार भरी आओ कवितायें करते हैं, रूठी – रूठी, टूटी- फूटी, योग भरी , वियोग भरी, चाहत में भी, दुत्कार […]
रेलगाड़ी की खिड़की में बैठा, एक युवक बोला पापा से कितने सुंदर पेड़ पौधे हैं, कितनी सुंदर है हरियाली ये सब कहते कहते उसके मुख पर, आ गई खुशियों की लाली वाह, कितने सुंदर तारे […]
मैं कवि नहीं हूं कविता सौ कोस दूर मुझसे कैसे बखान हो अब तेरा स्वरूप मुझसे। तेरे गुण बहुत अधिक हैं, मेरे पास शब्द कम हैं लय में भी आजकल कुछ, बिखरी हुई चुभन है। […]
जब तुम उदास हो, कोई भी ना पास हो, तब जो सहारा देती है , सब दुख बाट लेती है, वो मां ही तो है। बिस्तर गीला किया मैंने, वह सो गई गीले में , […]
मेरे रोम- रोम में बसे तेरा नाम , कण कण में तू रग- रग में तू, अद्वितीय तू, अखंड तू, क्षण- क्षण में रमा है तू, सुक्ष्म रूप भी है तेरा , और विशालकाय पर्वत […]
देख सखी, सावन की सुन्दर गीली – गीली सुबह सुहानी घिरे हुए हैं बादल नभ में चारों ओर बरसता पानी। सूरज की किरणों ने शायद खुली छूट दे दी बादल को, तभी घेरकर नभमंडल को […]
तू हड़बड़ाता क्यों है , और घबराता क्यों है, तेरे दुख दर्द को , कोई देख रहा है, तू अपने ज़हन में , झांक जरा सा । वो रमा है तेरे ही, अंतर्मन में; मन […]
गर्व हमें है इस भूमि पर,जिस पर हमने जन्म लिया कर्म है मेरा उसे संवारना,जिसने हमपर उपकार किया । मातृभूमि वह मेरी, जहाँ महावीर ने अवतरण लिया कर्मभूमि वह मेरी,बुद्ध ने जहाँ अहिंसा का वरण […]
सांझ पड़ रही है धीरे धीरे अँधेरा रफ़्तार ले रहा है। चिडियांएं घौंसलों में लौट रही हैं। पहाड़ों की चोटियों से झुरमुट-झुरमुट उजाला लौट रहा है छिपे सूरज की ओर। अँधेरा उतर रहा है नीचे […]
एक गांव में किस्मतवाली बूढ़ी अम्मा रहती है, चार हैं बेटे चार बहू हैं, फिर भी भूखी रहती है। अलगौझे में नहीं बंटा जो एक वही सामान थी क्योंकि किसी चाह नहीं थी बूढ़ी मां […]
पेट में आया था जिस दिन तू फूले नहीं समाई थी मैं, बार -बार छूं उदर त्वचा को मन ही मन मुस्काई थी मैं। नौ महीने तक पल पल तेरा ख्याल सजाया था मन ही […]
कौन-सी मंजिल है अपनी किसे किधर जाना कहाँ है क्या है पहचान अपनी किस डगर से जाना यहाँ है । लौटकर भी आएँगे यहाँ पर या वही रम जाएँगे सोच लो रूक कर जरा क्या […]
कहां है वो , सबकी नींव धरने वाला! सबका दाता कहलाने वाला! कैसे खा गए , वो दरिंदे उस कच्ची सी कली को, बहुत ख़रोंचे है, मोम जैसे हाथों पर ! निकली है बाहर आंखें, […]
असहायों की मदद को उठो, रुको मत, उठो उठो ना, जो असहाय हैं, जिनका कोई सहारा नहीं उन्हें तुम सहारा दो। जो डूब रहे हैं उन्हें किनारा दो। उठो, सोचो मत, उठो तुम मदद कर […]
जय हो कृषक, जय हो किसान, भारत मां का तू सम्मान “लॉकडाउन” की मजबूरी में, महंगे दामों बेच रहे थे,जब साहूकार अपना सामान तब भी भूमिपुत्र ने अन्न दिया, अधिक दाम भी नहीं लिया शत […]
मंजुल रूप लेकर, देख सखी आए हैं जवांई। रौनक लग गई मेरे घर पर, बजने लगे ढ़ोल शहनाई आया घोड़ी पे सवार ,वो बांका कुमार, लाने मेरी बिटिया के जीवन में बहार देख के उसको […]
शतशत नमन उन वीरों को,कारगिल विजय दिलवाई थी स्वदेश की रक्षा की खातिर प्राणों की भेंट चढाई थी।। साठ दिनों तक जो चली पाकभारत की लङाई थी कितनों ने जान की बाजी हंस के यूँ […]
जीवन दायनी ये नदियां पहुँचती हैं जब विकरालता के चरम पर लील लेतीं हैं उनकी ज़िन्दगियाँ जिन्दा रहते हैं जो इनके करम पर।। भूमि तो उर्वर कर जाती हैं पर कयी दंश भी दे जाती […]
बाढ़ —— करनी है कुछ जनों की,सजा कितनों ने पाई है नदियों का यह रौद्र रूप हमारे कर्मों की भरपाई है । प्रकृति के दोहन में रहे यूँ मदमस्त हम कितना भी पा ले लगता […]
मुझको मेरे होने का एहसास कराने आई तू। फिर से जीवन जीने का आस जगाने आई तू । तुझे देख खुद को देखती,तुझसे ही खुद को परखती देख तुझे मै और निरखती,तुझ संग मैं भी […]
तेरी सफलता के चमक के आगे सितारों की चमक फीकी हो ! तेरे कठिन मेहनत का फल नीले गगन से भी ऊँची हो! ऐसी हो तेरी जय गाथा तू आगे सफलता तेरे पीछे हो! मुकम्मल […]
गांव का मकान रोता तो होगा। मेरे आने की आस में सोता ना होगा।। ख़ुद को संभालने की कोशिश करता। घुट घुट के खंडहर होता तो होगा।। सिपाही बनकर पड़ा ताला भी। अब जंग से […]
गोरखा राइफल के जांबाज कैप्टन एम० के ० पांडे ने दुश्मन को घेरा वो बटालिक की दुर्गम पहाड़ी उस पहाड़ी से दुश्मन खदेडा। लग चुकी थी उन्हें गोलियाँ, फिर भी दुश्मन का बंकर उड़ाया, बन […]
मेरे घर में रहे तो फिर किराया दे गए होते भंवर में था , मुझे कोई किनारा दे गए होते नहीं कुछ और ख्वाहिश है सनम तुमसे मुझे लेकिन चले जाना हि था तो दिल […]
आज कारगिल विजय दिवस है नमन करें उन वीरों को, जिनके अदम्य शौर्य साहस से जीत मिली भारत माँ को. छलनी कर दुश्मन का सीना भारत मां का मान बढ़ाया, देश के गौरव की रक्षा […]
पुकार रही है भारतमाता आप सभी संतानों को, कलम उठा लो, खड़क उठा लो ख़त्म करो हैवानों को. बाहर-भीतर देश के दुश्मन, जो उन्नति के बाधक हैं, सामाजिक ताने-बाने को तोड़ रहे जो कारक हैं. […]
देश में बेकारी है आखिर किसकी जिम्मेवारी है। अक्षरबोध साक्षरता या अल्पज्ञान की बिमारी है।। मशीनी क्रांति का जोर या फिर बढ़ती हुई आबादी है। रोजगारों का अभाव या फिर निकम्मेपन सरकारी है।। साक्षर नहीं […]
चपरासी पद की भर्ती में, पीएचडी धारक आवेदक हैं, एक अनार है सौ बीमार हैं, जुगाड़ में बैठे पहरेदार हैं, इस जुगाड़ के खेल ने सारी प्रतिभाओं को निराश कर दिया, बेकारी के रोग ने […]
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