मुक्तक

तेरे सिवा कुछ मुझे नज़र आता नहीं है!

मेरा सफर यादों का गुजर पाता नहीं है!

राहें खींच लेती हैं इरादों की इसतरह,

ख्वाबे-जुत्सजू तेरा मुकर पाता नहीं है!

Composed By #महादेव

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Lives in Varanasi, India

Related Posts

मुक्तक

मुक्तक

मुक्तक

मुक्तक

1 Comment

  1. Ritika bansal - August 6, 2016, 11:04 pm

    nice

Leave a Reply