ग़ालिब

ग़ालिब के जन्मदिन पर सभी शायरों, कवियों को हार्दिक शुभकामनाये…
ग़ालिब ये किस जहान में तू हमे छोड़ गया है
ना सच्चाई है ना अफसाने ना यार रहे ना दीवाने
@प्रदीप सुमनाक्षर

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3 Comments

  1. सीमा राठी - December 28, 2017, 12:44 am

    कहीं भी इक फ़ूल भी नही, वीरान है जहां सारा
    इस जहान में है तो बस, गालिब तेरे शेर का सहारा

    • Pradeep - December 29, 2017, 6:00 pm

      बहुत खूब, भी दो जगह लग गया है।

  2. राही अंजाना - December 29, 2017, 10:44 am

    बढ़िया।।
    क्रप्या नव वर्ष आने को है कविता को वोट करें।

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