अँखियों में समन्दर

दिल दरिया है तेरा
तो मेरा भी कोई सरोवर नहीं।
झाँक के देखो तो
इन अँखियों में समन्दर मिलेगा।।

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

Responses

  1. कवि “शास्त्री” जी द्वारा प्रस्तुत यह शायरी स्वयं के दिल को दरिया की तरह बड़ा कहने वाले सहृदय को चुनौती दे रही है । ये पंक्तियाँ पाठक के दिल की धड़कन बढ़ाने और उसे थामने पर आमादा प्रतीत होती हैं। तत्सम शब्द व जनप्रचलित शब्दों का उचित तालमेल है। भाव प्रधान पंक्तियाँ हैं। बहुत खूब

New Report

Close