आदत से मजबूर

ऐसा नहीं कि हम
तेरे करतूतों से अनजान हैं
पर शिकायत किससे करें
अपनी आदत से हम लाचार हैं ।
चाहते हैं बदल दे खुद को
जवाब दे हर बेअदली का
परेशा हैं समझा के खुद को
अपना ही अरि बनने को तैयार है ।
जनमो-जन्म तक संग चलने को
संग रह, हर तंज, हंस के सहने को
जीवन ही नहीं, जिन्दगी के बाद भी
साथ देने का वादा बेअंजाम है ।


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6 Comments

  1. Satish Pandey - December 9, 2020, 10:56 pm

    सुन्दर अभिव्यक्ति

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - December 10, 2020, 9:51 am

    अतिसुंदर भाव

  3. Geeta kumari - December 10, 2020, 7:02 pm

    उम्दा अभिव्यक्ति

  4. Praduman Amit - December 10, 2020, 7:16 pm

    बहुत ही सुन्दर रचना है

  5. Pragya Shukla - December 11, 2020, 10:56 pm

    बेहद सराहनीय रचना

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