किसका दिल टूटा नहीं।

कौन बचा है पूरा,
किसका दिल टूटा नहीं।
इन हसरतों की दौर में ,
कौन रोता नहीं !

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दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

Responses

  1. जो पाषाण होतें हैं सिर्फ उनका नहीं
    इंसानों का हृदय कोमल होता है और दुःखता रहता है…
    सुन्दर रचना

  2. आज फिर मौसम नम हुआ, मेरी आँखों की तरह,
    शायद बादलों का भी दिल, किसी ने तोड़ा होगा

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