क्या बेटी होना गुनाह है

क़भी कोख़ में ही मार डाला उसे,
कभी काट के फेंक दिया खलिहानों में!!

कभी बेंच दिया उसे देह के बाज़ारों में ,
क़भी सरेराह नोचा सड़कों और चौराहों पे!!

जब जी चाहा पूजा देवियों सा,
कभी अपमानित किया उसे गालियों से!!

आगे बढ़ने की चाहत की तो दीवारों में क़ैद हुई,
कभी मान की ख़ातिर उसको झोंक दिया अंगारों में!!

दुर्गा,काली की धरती पर कैसी ये विडंबना ,
इस देश में बेटी होना क्यों है एक गुनाह.. ??

©अनु उर्मिल ‘अनुवाद’


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Related Posts

खिलौना मत बनाना

*अहोई-अष्टमी के तारे*

देश में कुछ ऐसा बदलाव होना चाहिए

*सूर्य-देव का रथ आया*

7 Comments

  1. Pragya Shukla - October 11, 2020, 3:55 pm

    बहुत ही मार्मिक रचना

  2. Satish Pandey - October 11, 2020, 5:14 pm

    बहुत गंभीर व मार्मिक अभिव्यक्ति,

  3. अनुवाद - October 11, 2020, 6:25 pm

    धन्यवाद सर

  4. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 11, 2020, 7:28 pm

    अतिसुंदर

  5. Geeta kumari - October 11, 2020, 8:57 pm

    मार्मिक रचना

Leave a Reply