क्षणिकाएं

1.

पहली ही सीढ़ी पर
एहसास हुआ,
सर पर खुला आसमां हो भले ही
अब –
पैर तले ज़मीन नहीं

2.

चाहे-अनचाहे उग आए हैं
संबंधों में
अपरिचय के विंध्याचल ;
हम भी जो
पा लेते थोड़ा सा
अगस्त्य का बौनापन !!!


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8 Comments

  1. Kanchan Dwivedi - March 4, 2020, 6:59 pm

    Nice

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - March 4, 2020, 8:08 pm

    Nice

  3. Antariksha Saha - March 4, 2020, 9:03 pm

    Khub kaha

  4. Pragya Shukla - March 4, 2020, 9:13 pm

    Nice

  5. Priya Choudhary - March 6, 2020, 3:13 pm

    Nice

  6. Pragya Shukla - March 8, 2020, 12:27 am

    Good

  7. Pragya Shukla - March 9, 2020, 8:12 pm

    Good

  8. Pragya Shukla - March 21, 2020, 1:26 pm

    सुंदर

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