गिरेबां

गिरेबां अपनी जब भी झांकता मैं।
हर बार पाता, कहाँ तू और कहाँ मैं।
आईना मैं भी देखता हूँ, वाकिफ़ हूँ,
और भी बेहतर हैं ‘देव’ तुझसे जहाँ में।

देवेश साखरे ‘देव’


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10 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - June 14, 2020, 6:52 am

    सुंदर

  2. Dhruv kumar - June 14, 2020, 9:06 am

    👌

  3. Geeta kumari - June 14, 2020, 1:26 pm

    सुंदर

  4. Pragya Shukla - June 18, 2020, 8:58 pm

    👌

  5. Abhishek kumar - July 11, 2020, 12:12 am

    👌👌

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