जिंदगी मौत सी

रुह जब लहू होकर रोती है
मौत से जिंदगी जब रूबरू होती है
लौट आते है सारे मंजर नजर में मेरी
जब जिंदगी मौत सी हूबहू होती है

Related Articles

नज़र ..

प्रेम  होता  दिलों  से  है फंसती  नज़र , एक तुम्हारी नज़र , एक हमारी नज़र, जब तुम आई नज़र , जब मैं आया नज़र, फिर…

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

Responses

  1. रूह और लहू में कोई समानता ना होने के कारण उसकी उपमा देना अनुचित है

New Report

Close