जो सोया है अंधकार में…!!

जो सोया है अन्धकार में
जागेगा नवल प्रभात

उठ-उठकर देखेगा किरणें
सूर्योदय सम होगा ललाट

रजत-चाँदनी में स्वप्न को
नित पुष्पित कर देखेगा

नारी सम्मोहन छोंड़ कवि
अब प्रगतिवाद में चमकेगा

बहुत हुआ प्रज्ञा! अब जीवन
किसलय सम पुष्पित होगा

तेरे अन्तस में सुन्दरतम्
उच्छवास होगा

तेरे मन-मण्डप में दुल्हन
सरिस सजेगी कविता

पाकर तेरे भाव सौष्ठव
बन बैठेगी वनिता ||

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

जंगे आज़ादी (आजादी की ७०वी वर्षगाँठ के शुभ अवसर पर राष्ट्र को समर्पित)

वर्ष सैकड़ों बीत गये, आज़ादी हमको मिली नहीं लाखों शहीद कुर्बान हुए, आज़ादी हमको मिली नहीं भारत जननी स्वर्ण भूमि पर, बर्बर अत्याचार हुये माता…

नवल

नवल सृजन हो,नवल सृष्टि हो उर अंतर में,नवल बृष्टि हो नवल दिशा हो नवल दृष्टि हो -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

Responses

  1. बहुत ही लाजवाब कविता
    आपने जिस प्रकार
    अपनी लेखनी की प्रगतिवाद विधा की बात की है
    उत्तम है…
    आप ऐसे ही अग्रसर रहें यही मनोकामना है

New Report

Close