तुम्हारे अंजुमन में

तुम्हारे अंजुमन में जब कभी
दो शब्द बोलूंगा,
हिला दूँगा मैं भीतर तक
सामने सत्य ला दूँगा।
नहीं चिंता मुझे है अब
कि मैं बदनाम होऊँगा
कर दिया खत्म सब तुमने
कहाँ अब नाम पाऊँगा।

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Responses

  1. बहुत ही अच्छी कविता ।बहुत ही सधे शब्दों का चयन
    मन के उद्दगार का सटीक चित्रण

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