दिवस विशेष

क्या माँ ने कभी विशेष दिन ही ममता लुटाया है।
क्या माँ ने मात्र किसी खास दिन ही खिलाया है।

क्या पिता ने कोई दिन देखकर जरूरतें पूरी की,
या फिर केवल एक दिन सही गलत सिखाया है।

इन्हें किसी एक दिन पूजना हमारी संस्कृति नहीं,
फिर मात्र एक दिन ही विशेष किसने बनाया है।

कैसी विडंबना है, हम कहने को तो आजाद हैं,
परंतु पाश्चात्य सभ्यता ने हमें गुलाम बनाया है।

देवेश साखरे ‘देव’


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Related Posts

भोजपुरी चइता गीत- हरी हरी बलिया

तभी सार्थक है लिखना

घिस-घिस रेत बनते हो

अनुभव सिखायेगा

5 Comments

  1. Pragya Shukla - June 21, 2020, 12:23 pm

    👌

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी - June 21, 2020, 6:02 pm

    वाह बहुत सुंदर

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - June 21, 2020, 7:23 pm

    Behtrin

  4. Abhishek kumar - July 10, 2020, 11:21 pm

    👌

  5. Abhishek kumar - July 31, 2020, 2:45 am

    बात सही है

Leave a Reply