नश्वर है, ये जीवन

जीवन क्या है?
क्या है जीवन!
लकड़ी का कोई फट्टा-सा,
पेड़ का कोई पत्ता-सा
कब टुट जाएं कुछ पता नहीं,
मानो कोई गुब्बारा-सा
तैरता मटका बेचारा-सा
कब फूट जाए पता नहीं।


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14 Comments

  1. Satish Pandey - August 6, 2020, 7:38 am

    बहुत खूब, मार्मिक

  2. Neha - August 6, 2020, 7:43 am

    Nice

  3. Praduman Amit - August 6, 2020, 7:51 am

    Uttam vichar

  4. Geeta kumari - August 6, 2020, 9:25 am

    सत्य परन्तु मार्मिक

  5. Anuj Kaushik - August 6, 2020, 12:35 pm

    सुन्दर रचना

  6. Vasundra singh - August 6, 2020, 12:49 pm

    As Kabir said, यह संसार कागद की पुड़िया
    बूंद पड़े घुल जाना है

  7. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - August 6, 2020, 5:55 pm

    भारतीय दर्शन का सुन्दरता से प्रस्तुति

  8. Pratima chaudhary - September 3, 2020, 8:16 pm

    बहुत ही उम्दा

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