“नहीं होता”

ღღ_वो चाँद जो दिखता है, वो सबको ही दिखता है;
महज़ देख लेने भर से ही, वो हमारा नहीं होता!
.
दिन तो कट ही जाता है, कश्मकश में जिंदगी की;
तेरे बिन एक पल भी, रातों में गुज़ारा नहीं होता!!
.
कैसे कह दूँ कि मुझे तुमसे, मोहब्बत ही नहीं है;
आख़िर मैं यूँ ही तो बे-वजह, आवारा नहीं होता!!
.
एक रिश्ता है कई जन्मों से, दरमियान अपने शायद;
वरना ज़रा-सी बात में तुम मेरी, मैं तुम्हारा नहीं होता!!
.
मैं एक शायर हूँ “अक्स”, और वो मेरी ही गज़ल है;
ना इश्क़ होता और ना मैं, गर तेरा इशारा नहीं होता!!….‪#‎अक्स‬
.


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

A CA student by studies, A poet by passion, A teacher by hobby and a guide by nature. Simply I am, what I am !! :- "AkS"

Related Posts

मेरे भय्या

लंबी इमारतों से भी बढकर, कचरे की चोटी हो जाती है

लंबी इमारतों से भी बढकर, कचरे की चोटी हो जाती है

तकदीर का क्या, वो कब किसकी सगी हुई है।

3 Comments

  1. Devki jadon - June 26, 2016, 4:40 pm

    behtareen

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 9, 2019, 7:42 pm

    बहुत खूब

  3. मोहन सिंह मानुष - August 22, 2020, 10:57 am

    लाजवाब

Leave a Reply