बारिश का इंतज़ार

लगाकर टकटकी मैं किसी के इंतज़ार बैठा हूँ,
भिगा देगी जो मुझ किसान की धरती मैं उसी के एहतराम में बैठा हूँ,
बेसर्ब बंज़र सी पड़ी है मेरे खेतों की मिट्टी,
मैं आँखों में हरियाले ख़्वाबों के मन्ज़र तमाम लिए बैठा हूँ॥
राही (अंजाना)


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Related Posts

इलज़ाम

सरेआम रक्खे हैं।

बैठी है

बैठी है

जवाब माँगता है

5 Comments

  1. Ajay Nawal - March 1, 2017, 3:38 pm

    nice

  2. Neha - March 4, 2017, 12:58 pm

    Exotically appreciable

  3. Abhishek kumar - November 25, 2019, 9:43 pm

    Nice

  4. प्रतिमा - September 8, 2020, 11:32 pm

    सुन्दर प्रस्तुति

Leave a Reply