बिटिया रानी

छोटी सी है बिटिया रानी
ऐसी लगती बड़ी सयानी,
अपनी ही भाषा में जाने
क्या कहती है गुड़िया रानी।
वॉकर में बैठाओ कहती
उसमें पांव टिकाकर चलती
खड़े नहीं हो पाती है पर
करती है काफी शैतानी।
कहती है बस गोदी में लो
इधर घुमाओ उधर घुमाओ,
चीजों को मुंह में लेती है,
धूम मचाती गुड़िया रानी।
थोड़ी देर पकड़ती गुड़िया
छम छम छम झुनझुना बजाती,
जिससे खेल लिया फिर उससे
ऊबने लगती गुड़िया रानी।
भूख लगी तो सायरन देती
प्यास लगी तो होंठ बताते,
मम्मी उसकी समझ लेती है
चाहती क्या है गुड़िया रानी।


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20 Comments

  1. Piyush Joshi - October 18, 2020, 7:32 pm

    वाह बहुत ही लाजवाब, वात्सल्य से भरपूर

  2. MS Lohaghat - October 18, 2020, 7:33 pm

    वात्सल्यमयी रचना

  3. Suraj Tiwari - October 18, 2020, 8:02 pm

    बहुत खूब रचना

  4. Vasundra singh - October 18, 2020, 8:03 pm

    बहुत बढ़िया

  5. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 18, 2020, 8:11 pm

    बहुत सुन्दर

  6. Geeta kumari - October 18, 2020, 8:18 pm

    अरे वाह, कवि सतीश जी ने छोटी सी गुड़िया रानी पर बहुत ही सुन्दर कविता रची है। छोटे बच्चों की हर बाल सुलभ घटनाओं का बहुत ही खूबसूरती से वर्णन किया है । अति सुंदर भाव और लय बद्ध शैली से परिपूर्ण अति सुंदर रचना

    • Satish Pandey - October 18, 2020, 9:30 pm

      इस सुन्दर और बेहतरीन समीक्षा हेतु हार्दिक धन्यवाद गीता जी, आपकी इस समीक्षा शक्ति को सादर अभिवादन।

  7. Chetna jankalyan Avam sanskritik utthan samiti - October 18, 2020, 8:26 pm

    बहुत सुन्दर वाह

  8. Ramesh Joshi - October 18, 2020, 8:32 pm

    बहुत सुन्दर सर वाह, वात्सल्य रस सजा है

  9. Harish Joshi - October 18, 2020, 9:07 pm

    क्या खूब रचना है। मज़ा ही आ गया।गुड़िया रानी की कारगुजारियां पढ़कर दिल खुश हो गया।

  10. Chandra Pandey - October 19, 2020, 7:45 am

    Very very nice

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