बिटिया रानी

छोटी सी है बिटिया रानी
ऐसी लगती बड़ी सयानी,
अपनी ही भाषा में जाने
क्या कहती है गुड़िया रानी।
वॉकर में बैठाओ कहती
उसमें पांव टिकाकर चलती
खड़े नहीं हो पाती है पर
करती है काफी शैतानी।
कहती है बस गोदी में लो
इधर घुमाओ उधर घुमाओ,
चीजों को मुंह में लेती है,
धूम मचाती गुड़िया रानी।
थोड़ी देर पकड़ती गुड़िया
छम छम छम झुनझुना बजाती,
जिससे खेल लिया फिर उससे
ऊबने लगती गुड़िया रानी।
भूख लगी तो सायरन देती
प्यास लगी तो होंठ बताते,
मम्मी उसकी समझ लेती है
चाहती क्या है गुड़िया रानी।

Published in हिन्दी-उर्दू कविता

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Responses

  1. अरे वाह, कवि सतीश जी ने छोटी सी गुड़िया रानी पर बहुत ही सुन्दर कविता रची है। छोटे बच्चों की हर बाल सुलभ घटनाओं का बहुत ही खूबसूरती से वर्णन किया है । अति सुंदर भाव और लय बद्ध शैली से परिपूर्ण अति सुंदर रचना

    1. इस सुन्दर और बेहतरीन समीक्षा हेतु हार्दिक धन्यवाद गीता जी, आपकी इस समीक्षा शक्ति को सादर अभिवादन।

  2. क्या खूब रचना है। मज़ा ही आ गया।गुड़िया रानी की कारगुजारियां पढ़कर दिल खुश हो गया।

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