बुजुर्गों का साया

बेशक दौलत बेशुमार नहीं कमाया है।
मगर मेरे सर पर, बुजुर्गों का साया है।

ज़हां की दौलत कम है, मेरे खजाने से,
दुआओं का खजाना, मेरा सरमाया है।

हादसा सर से गुजर गया, मैं बच गया,
लगता है, दुआओं ने असर दिखाया है।

पाँव में काँटा, कभी चुभ नहीं सकता,
पाँव जिसने भी, बुजुर्गों का दबाया है।

जन्नत सुना था, ज़मीं पर ही देख लिया,
कदमों में इनके, जब भी सर झुकाया है।

देवेश साखरे ‘देव’

सरमाया- संपत्ति

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8 Comments

  1. राम नरेशपुरवाला - September 21, 2019, 9:33 am

    खूब लिख है

  2. NIMISHA SINGHAL - September 21, 2019, 11:00 am

    Sahi baat

  3. Poonam singh - September 21, 2019, 11:05 am

    Bilkul sahi kaha

  4. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 21, 2019, 3:02 pm

    वाह बहुत सुन्दर

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