मनुष्य हो तुम

मनुष्य हो तुम
मनुष्यता सदैव पास रखो
पाशविक वृत्तियों को
पास आने न दो।
दया का भाव रखो
प्रेम की चाह रखो
ठेस दूँ दूसरे को
भाव आने न दो।
दया पहचान है कि
आप में मनुष्यता है
अन्यथा फर्क क्या है
फर्क का भान रखो।
पेट भर जाये खुद का
खूब भरता ही रहे
भले औरों को क्षुधा
चैन लेने ही न दे,
भावना आदमियत की
नहीं यह ध्यान रखो,
दया धरम ही सच है
मन में इसका ज्ञान रखो।


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Related Posts

मुस्कुराना

वह बेटी बन कर आई है

चिंता से चिता तक

उदास खिलौना : बाल कबिता

4 Comments

  1. Geeta kumari - February 21, 2021, 10:52 am

    मनुष्यता सदैव पास रखो पाशविक वृत्तियों को
    पास आने न दो। दया का भाव रखो
    प्रेम की चाह रखो
    ______मनुष्यता के गुण समझाती हुई कवि सतीश जी की बहुत सुंदर प्रस्तुति। उत्तम लेखन

  2. Piyush Joshi - February 21, 2021, 11:07 am

    अति उत्तम रचना

  3. Devi Kamla - February 21, 2021, 11:08 am

    बहुत खूब

  4. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - February 22, 2021, 7:33 pm

    अतिसुंदर भाव

Leave a Reply