मुक्तक

नहीं आँचल कभी खिसकने दी
वो अपने माथ से।
आज देख रहे हैं सब उसको
होकर यूं अनाथ से।।


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7 Comments

  1. Geeta kumari - August 5, 2020, 10:15 pm

    बहुत ख़ूब..

  2. Geeta kumari - August 5, 2020, 10:31 pm

    मार्मिक पंक्तियां

  3. Suman Kumari - August 5, 2020, 10:34 pm

    सुन्दर

  4. vivek singhal - August 5, 2020, 10:47 pm

    Lagata hai aapki
    Bahoo me saTh koi anhoni ho gayi hai.
    Agar Maine kuch
    Galat kah diya ho to sir maaf kar dijiyega.

  5. मोहन सिंह मानुष - August 5, 2020, 10:57 pm

    करुणादायी व मार्मिक

  6. Satish Pandey - August 6, 2020, 7:29 am

    मार्मिक पंक्तियाँ

  7. Neha - August 6, 2020, 7:46 am

    👌

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