रखो न हीन भावना (दिगपाल छंद में)

रखो न हीन भावना बुलंद भाव से चलो,
सदैव सिर उठा रहे कभी नहीं कहीं झुको।
झुको उधर जिधर लगे कि सत्य की है भावना,
सिर उधर झुके न जिधर झूठ की संभावना।
तोलना किसी को है तो आचरण से तोल,
धन अधिक है कम है न कर आदमी का मोल।
बोलना है गर कभी तो बोल मीठे बोल,
नेह दे अगर कोई तो द्वार दिल के खोल।
आदमी सभी समान हैं नहीं ये भेद रख,
एकता की भावना से प्रेमरस का स्वाद चख।
सार्वभौम सत्य है कि प्रेम भावना रखो,
बुलंद मन बुलंद तन, बुलंद भावना रखो।
—— डॉ0 सतीश चंद्र पाण्डेय
काव्य दिशा- दिगपाल मात्रिक छंद की इस काव्य रचना में 12-12 मात्राएं समाविष्ट हैं। कुल 24 का पद प्रस्तुत करने का प्रयास है।


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7 Comments

  1. MS Lohaghat - December 26, 2020, 10:48 am

    बहुत ही बढ़िया भाव

  2. harish pandey - December 26, 2020, 10:50 am

    Wah bhut shaandar

  3. Geeta kumari - December 26, 2020, 12:06 pm

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

  4. Piyush Joshi - December 26, 2020, 3:59 pm

    बहुत खूब, अति सुन्दर

  5. Sandeep Kala - December 26, 2020, 6:12 pm

    बहुत ही सुंदर रचना

  6. Rishi Kumar - December 26, 2020, 7:05 pm

    बहुत बहुत सुन्दर रचना

  7. Pragya Shukla - December 27, 2020, 7:29 pm

    सही और सटीक शब्दों के साथ सुंदर रचना

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