राम बन जा आज तू

ओ युवा!!
भारत के मेरे,
राम बन जा आज तू,
खुद हरा भीतर का रावण,
धर्म धनु ले हाथ तू।
बढ़ रहे हैं नित दशानन
हम जला पुतला रहे हैं,
जल गया रावण समझ कर
खूब मन बहला रहे हैं।
बम-पटाखे फोड़ कर
रावण नहीं मर पायेगा
अब मरे सचमुच में रावण
कौन यह कर पायेगा।
अब भरोसा एक ही है
जाग तू प्यारे युवक
तू नया बदलाव ला दे
मार दे रावण युवक।
पापकर्मों में लगे हैं
सैकड़ों रावण यहां,
दस कहाँ लाखों मुखौटे
ढक रहे रावण यहाँ।
दम्भ में, अभिमान में
मद में, भरे रावण यहां,
पीसते कमजोर को हैं
लूटते रावण यहां।
नारियों पर जुल्म करते
दिख रहे रावण यहां,
भ्रूण हत्या पाप करते
सैकड़ों रावण यहाँ।
अब उठा ले तू धनुष
ओ युवा!! भारत के मेरे,
राम बन जा आज तू,
रावण मिटा दे आज रे।
—– डॉ0 सतीश चन्द्र पाण्डेय
चम्पावत, उत्तराखंड।


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6 Comments

  1. Devi Kamla - October 22, 2020, 10:36 pm

    वाह, गजब की कविता लिख दी पाण्डेय जी, जितनी तारीफ की जाये कम है, आपकी लेखनी शानदार कर रही है। वाह

  2. Piyush Joshi - October 22, 2020, 10:41 pm

    वाह सर, आज की कविताओं ने आनंदित कर दिया। जय हो

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 22, 2020, 11:23 pm

    अतिसुंदर भाव

  4. Geeta kumari - October 22, 2020, 11:30 pm

    वाह सर बहुत ही सुन्दर कविता है । विजय दशमी के पावन अवसर पर श्री राम के आदर्शो को स्मरण करवाती हुई बेहद शानदार रचना । आज कल के समाज में ,समाज को सुधारने के लिए, ऐसी कविताओं की बहुत जरूरत है । उच्च स्तरीय लेखन

  5. Pragya Shukla - October 22, 2020, 11:48 pm

    क्या बात है भाई अनमोल रचना है

  6. Anu Singla - October 23, 2020, 8:19 am

    बहुत खूब

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