वचन

यदि बाँधने जा रहे हो किसी को
वचनों की डोर से, तो इतना
स्मरण रखना

कहीं झोंक न दे वचन तुम्हारा
उसे उम्र भर की अनन्त
प्रतीक्षा में…

क्योकि,
प्रतीक्षा वह अग्नि है जो भस्म कर
देती है स्वप्नों और उम्मीदों के
साथ-साथ मनुष्य की
आत्मा को भी…!!

©अनु उर्मिल ‘अनुवाद’


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6 Comments

  1. Geeta kumari - February 11, 2021, 9:57 pm

    प्रतीक्षा वह अग्नि है जो भस्म कर
    देती है स्वप्नों और उम्मीदों के
    साथ-साथ मनुष्य की
    आत्मा को भी…!!
    _________ बहुत सुंदर और उच्च स्तरीय विचार प्रस्तुत किए हैं अनु जी आपने अपनी रचना में,बहुत ही गहरा सत्य छिपा है। रचना हृदय को छू गई , लाजवाब अभिव्यक्ति

  2. अनुवाद - February 11, 2021, 10:07 pm

    प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद सखि 🌺🙏

  3. Antariksha Saha - February 11, 2021, 11:02 pm

    बहुत खूब कहां बिछारने का कारण हमसब के कटु वचन ही है

  4. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - February 12, 2021, 10:33 am

    बहुत खूब

  5. vikash kumar - February 12, 2021, 6:40 pm

    Jay ram jee ki

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