वजूद

लफ़्ज़ों की कमी थी आज शायद
या रूह में होने वाले एहसास की
💐💐💐💐💐💐💐💐
नही पता मुझको कहानी तेरी शायद
बस इतना जानती हूं कि वजूद को तेरे

💐💐💐💐💐💐💐💐
तूझसे ज्यादा जानती हूं शायद
ख्वाबबगाह में जो बसता है वो
💐💐💐💐💐💐💐💐💐
अलग सी खुमारी और कशिश शायद
मेरे रोम रोम में बसी है जो
💐💐💐💐💐💐
कैसे बताऊं तुमको क्या रूमानी एहसास है वो
कैसे यकीं दिलाऊं कितना रूमानी है वो
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
बिन फरेब कितना मासूम है वो
किसी ख्वाबगाह का सरताज हो शायद


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7 Comments

  1. Suman Kumari - February 24, 2021, 9:16 pm

    बहुत सुंदर

  2. Geeta kumari - February 24, 2021, 9:37 pm

    सुंदर रचना

  3. Rakesh Saxena - February 25, 2021, 6:28 am

    बहुत खूब

  4. Satish Pandey - March 1, 2021, 12:04 am

    सुन्दर रचना, सुन्दर भाव, बहुत खूब

  5. Pragya Shukla - March 8, 2021, 1:48 pm

    Beautiful

  6. Pragya Shukla - March 8, 2021, 1:49 pm

    सावन पर आती रहिए

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