समन्दर की गहराई

समन्दर की गहराइयों में
उतर के देखो तो एक बार।
बहुत से राज खुल जाएंगे
जो छुपे हुए थे हरेक बार।।
मोती भी हैं सीप भी प्यारे
रत्नों का है बड़ा खजाना।
उतरोगे तो पाओगे तुम
गहराई से नहीं डर जाना।।
गहराई है पर दिल से गहरा
दुनिया में क्या होगा।
विनयचंद बहे प्रेम की नदियाँ
सतत समुद्र समाहित होगा।।


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10 Comments

  1. Rishi Kumar - April 7, 2021, 6:34 pm

    बहुत सुन्दर

  2. Geeta kumari - April 7, 2021, 7:37 pm

    समन्दर की गहराइयों में
    उतर के देखो तो एक बार।
    बहुत से राज खुल जाएंगे
    ………. बहुत सुंदर रचना है भाई जी, , ” जिन खोजा तिन पाइयां गहरे पानी पैठ”…. सागर जितनी गहराई लिए हुए अत्यंत सुंदर रचना

  3. Satish Pandey - April 7, 2021, 10:02 pm

    वाह वाह अतिसुन्दर रचना

  4. Pragya Shukla - April 7, 2021, 10:31 pm

    समन्दर की गहराइयों में
    उतर के देखो तो एक बार।
    बहुत से राज खुल जाएंगे
    जो छुपे हुए थे हरेक बार।।
    मोती भी हैं सीप भी प्यारे
    रत्नों का है बड़ा खजाना।

    देर आए दुरुस्त आए

    बहुत ही सरस, मधुर तथा कवि मन को आनन्दित करती रचना

  5. Devi Kamla - April 7, 2021, 10:56 pm

    बहुत खूब

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