सुनो गाँव ! अब परदेश ना जाना

आयी विपदा न कोई सहाय हुआ
छूटा रोजगार बहुत बुरा हाल हुआ
तुम्हारा कष्ट भी किसी ने न जाना
पसीने से सींचा जिन शहरों को…
किसी ने तनिक एहसान न माना
सुनो लला!अब परदेश न जाना।।

छोड़ आये थे तुम जिसे एक दिन
आयी फिर उस गाँव-घर की याद
पश्चाताप की इस कठिन घड़ी में
न ही तेरा कोई हुआ सहाय…
गाँव का सफ़र पैदल पड़ा नापना
सुनो लला!अब परदेश न जाना।।

तुम गाँव मे रहकर मेहनत खूब कर लेना
परिवार का भरण पोषण भी कर लेना
मन हो भ्रमित तो याद फिर…
खूब उन विपदा के पलों को कर लेना
सुनो लला!अब परदेश न जाना।
सुनो गाँव!अब परदेश न जाना।।


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7 Comments

  1. महेश गुप्ता जौनपुरी - May 23, 2020, 11:43 pm

    वाह बहुत सुंदर

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - May 24, 2020, 6:40 am

    Nice

  3. महेश गुप्ता जौनपुरी - May 24, 2020, 1:41 pm

    वाह बहुत सुंदर

  4. Abhishek kumar - May 26, 2020, 9:17 am

    अति सुन्दर रचना 👌👌

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