स्वतंत्रता दिवस

पंद्रह अगस्त का पावन दिन , वीरों की याद दिलाता है |
शहीद हुए जो देश के खातिर , उनकी कथा सुनाता है |
तेरह वर्ष की उम्र में आकर , चौदह कोड़े थे खाये |
भारत माँ के लिए लड़े और , आजाद चन्द्र शेखर कहलाये |
गांधी ,सुभाष, बिस्मिल, रोशन ने , देश के खातिर प्राण दिये |
भारत की आजादी के हित , सारे सुख थे त्याग दिये |
लाल ,बाल और पाल ने मिलकर , आजादी का बिगुल बजाया |
लक्ष्मी, तात्या तोपें ने था , विद्रोह का स्वर गरमाया |
पूरब से लेकर पश्चिम तक , उत्तर से लेकर दक्खिन तक |
हर बच्चे के मन भभक उठी , आजादी की ज्वाला धधक उठी |
फिर भारत माँ की लाज बचाने , भारत का हर बच्चा आया |
लड़ता रहा साँस थी जब तक , दुश्मन को था मजा चखाया |
अरि के चंगुल से हमने तब , भारत को आजाद कराया |
लाल किले के ऊपर हमने , यह भव्य तिरंगा लहराया |
भारत के हर प्राणी को , आज कसम यह खाना है |
पंकज प्राण भले ही जायँ, पर झंडे को लहराना है |
आदेश कुमार पंकज

Published in हिन्दी-उर्दू कविता

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