16 Comments

  1. बनूं मैं जानकी तेरी
    तू मेरा राम हो जाए।…
    बहुत ही उच्च स्तरीय लेखन है आपका। सदैव यूं ही आगे बढ़ती रहें। इस लेखन को सैल्यूट।

      1. उम्र में मुझसे छोटी हो आशीष तो दूंगी ही।
        बस, दुआ करो कि ये दुआ कुबूल हो जाए..

  2. पाठक के मानस पटल पर सीधे तौर पर अंकित हो सकने में सक्षम इस कविता में प्यार है, मनुहार है। और एक आदर्श स्थिति की स्थापना की गई है। कवि की जबरदस्त साहित्यिक क्षमता को प्रकट करती सुन्दर कविता है।

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