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  1. कर्म के लिए कहां कोई करार
    बैठे हैं बेकार आलस की कतार
    _________ समसामयिक यथार्थ चित्रण प्रस्तुत करती हुई राजीव रंजन जी की बहुत सुंदर रचना

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