तीन रंगों से बना हुआ पहचान हमारी है सारे जग से प्यारा तिरंगा शान हमारी है आन, बान, सम्मान का सूचक राष्ट्रनिष्ठा और ज्ञान का सूचक प्रतीक ये अपने संविधान का है अपने अभिमान का […]
तीन रंगों से बना हुआ पहचान हमारी है सारे जग से प्यारा तिरंगा शान हमारी है आन, बान, सम्मान का सूचक राष्ट्रनिष्ठा और ज्ञान का सूचक प्रतीक ये अपने संविधान का है अपने अभिमान का […]
लहू है बहता सड़कों में आक्रोश है कुम्हलता गलियों में लफ़्जों मे है क्यों नफ़रत का घर आग है फैली क्यों फिजाओं में रंगो में है क्यों बारूद भरा क्यों दीये अंधेरों में रोते है […]
थप थप की आवाज से अचानक मैं चोंक गया इक मासूम सा बच्चा खड़ा था, मेरी कार के बाहर अपने कुछ तिरंगो के साथ बेचना चाहता था शायद कमाना चाहता था कुछ पैसे अपनी मां […]
काश! कोई तो रास्ता निकले. मुश्किलों से मेरा गला निकले. जान..छूटेगी.. उसके.. छूने से, जान आये तो मेरी जां निकले. लाख सदियों में तय नहीं होगा, फ़ासले.. इतने दरमियां निकले. कौन.. होता हूँ.. दोष दूँ […]
इस देश में अजीब किस्म की बात चल रही है, हिन्दू , मुस्लिम ,सिख ,ईसाई कहने को है सब भाई-भाई ख़ास तौर पर हिन्दू और मुस्लिमान इस कविता में न कोई ऐसा नाम हैं जो […]
Bharat maa ke in stambhon ko shat shat mera pranam hai Ek jawan ek kisaan aur ek vigyaan hai. Bharat maa ke vagyaniko ka kya kehna…. Ye hai hamari matribhumi ka anmol gehna Aaj inki […]
देख तिरंगे की लाचारी कैसे हर्शाएं हम आजादी पर कैसे नांचे कैसे झूमे गायें हम भारत माँ का झंडा जब पैरों के नीचे आता है और जहाँ अफ्जालों पर मार्च निकाला जाता है जिस […]
गीत आधार छंद-द्विगुणित चौपाई कुल ३२ मात्राएँ , १६-१६ पर यति ★■◆●★■◆●★■◆●★■◆●★■◆●★■◆◆●★■◆●★■◆●★ आओ तुमको ले चलूँ वहाँ, जिस जगह वीर इक सोया था । डोली थी सजी हुई लेकिन, वह आत्ममुग्ध सा खोया था । […]
गुलामी में भी हमारे दिल में देश की शान काफी थी, तोड़ देते थे होंसला अंग्रेजो का हममे जान काफी थी, पहनते थे कुर्ता और पाजामा खादी की पहचान काफी थी, गांधी जी के मजबूत […]
ये लहू कह रहा है कि भूल न जाना, न हम कर सके जो वो करके दिखाना, हम मिटे सरहदो पे कोई गम हमें नहीं इस हिन्द की आजादी का , न कोई मोल तुम […]
हिन्द के निवासियों धरती माँ पुकारती है उठ खड़े हो जाओ तुम माँ भारती पुकारती है धर्म, जाती-पाती से तुम बाहर आकर भी देख लो आजाद भारत में आज भी मजदूर बंधुआ बने देख लो […]
आतंकी की महिमा मंडित मंदिर और शिवाले खंडित पशु प्रेमी की होड़ है फ़िर भी बोटी चाट रहे हैं पंडित भ्रष्टों को मिलती है गोदी देशभक्त होते हैं दंडित सत्ता का हर इक दलाल बन […]
मिजाजे यार ने हैरत में डाल रखा है रकीबो से ये जो रिश्ता कमाल रखा है सुब्ह से शाम तलक ख्वाहिशों को पाला है ए ज़िन्दगी तुझे ऐसे संभाल रखा है देखा है वक्त ने […]
मन शंकित हो तो बढ़ना कैसा रण निश्चित हो तो डरना कैसा जब मान लिया तो मान लिया अब विरुद्ध चाहे स्वयं विभु हों जब ठान लिया तो ठान लिया अब सन्मुख चाहे स्वयं प्रभु […]
खल्क ये खुदगर्ज़ होती। आरही नज़र मुझे।। इंकलाब आयेगा ना अब। ये डर सताता अक्सर मुझे।। अशफ़ाक़ की,बिस्मिल की बातें। याद कब तक आएँगी।। शायद जब चेहरे पे तेरे। झुर्रियां पड़ जाएँगी।। क्या भूल गए […]
आजादी का विजय पर्व , हम मिलकर आज मनायें | आज की मधुरिम बेला पर ,हम गीत खुशी के गायें | एक झोपडी भी भारत में , कहीं सूनी न रह जाये | एक भी […]
पंद्रह अगस्त का पावन दिन , वीरों की याद दिलाता है | शहीद हुए जो देश के खातिर , उनकी कथा सुनाता है | तेरह वर्ष की उम्र में आकर , चौदह कोड़े थे खाये […]
जितने भी थे फरेबी सियासत में आ गये बाकी बचे जो उनकी हिमायत में आ गये कानून को जो खेल समझते रहे सदा वो आज देख लीजे अदालत मे आ गये अब पाँच साल बाद […]
गीत बुलबुल सुनाती रही रात भर दिल में अरमां जगाती रही रात भर वादे गिनते रहे तेरे तारों के संग चाँदनी दिल जलाती रही रात भर ज़द पे किसने हवाओं की छोड़ा इसे शम’अ ये […]
ये लहू कह रहा है कि भूल न जाना, न हम कर सके जो वो करके दिखाना, हम मिटे सरहदो, पे कोई गम हमें नहीं इस हिन्द की आजादी का , न कोई मोल तुम […]
Suno–sunaai degi tumhe– Bharat maa ki chittkaar Lahoo bahe– jo mere beto ke Kyu hota ja rahaa bekaar…?? Shahaadat mere laal ki Chup pattharro mei simat gyi hai Mujhpar mar mitna mere bachcho ka– Kyu […]
ताउम्र तलाशती रहती थी आॅखियाॅ जिनको वो ना मिला मुझे पूरे जहान् में जब पलकों को गिराकर ध्यान लगाया श्याम की सलोनी सूरत का फिर धीरे से उठाई पलकों की चिलमन तो श्याम सुंदर की […]
सुप्रभात ! शुभ दिवस !! आपका दिन मधुर और मंगलमय हो !!! रात को छत पर जाकर देखो.. चांदनी में ज़रा नहा कर देखो । चाँद को पास बुला कर देखो.. गीत सुहाना तुम गा […]
उसके सिर्फ दो बेटियाँ थी दोनों सरकारी स्कूल मैं पढती थी अबकी उन्हें सिर्फ बेटा ही चाहिए था लेकिन फिर से बेटी हो गई अभी आधा घंटा ही जी पाई थी अल्लाह को प्यारी हो […]
जीवन तो है आना जाना। अपने फर्ज कभी न भुलाना। अपने वतन पर मिटेंगे हम कभी न कदम पीछे हटाना। जो जां काम न आए वतन पर कैसे मां रा कर्ज चुकाना। आओ कदम बड़ाएं […]
जहाँ हमें मिलना था वहीं मिलते तो अच्छा था जहाँ दूरियां न होती नजदीकीयां होती वहीं मिलते तो अच्छा था जहाँ फूल खिलते बहारें होती वहीं मिलते तो अच्छा था जहाँ सपने न होते हकीकत […]
अपनी पड़ोसनों को किट्टी पार्टी में जाते जब भी देखती थी मन से कभी आह तो कभी गाली निकलती थी मुझे भी किट्टी पार्टी का भूत सवार था अब तो पतिदेव का जीना दुश्वार था […]
आजाद हैं हम या अफवाह है फैली चारों ओर आजादी की, जंज़ीरों में बंधी है आजादी या बेगुनाही में सज़ा मिली है आजादी की, हकीकत है भी हमारे देश की आजादी की, या बस गुमराह […]
**मेरी गज़लों में तुझे ढूढ रहे हैं ज़माने वाले** मेरी गज़लों में तुझे ढूढ रहे हैं ज़माने वाले, अब कहां तुझको छुपाऊं छोड़ के जाने वाले l कोई तो है जो इस […]
हो गए आज़ाद मगर क्या खोया क्या पाया है। आज़ादी के पंखों पर आतंक का गहरा साया है। शहीदों को श्रद्धांजलि सच्ची होगी यही अब के, कम न होने देंगे आन,शान अपना यही सरमाया है। […]
वही हर परेशानी की सुबह, वही हर परेशानी की शाम, वही बिखरता हुआ मानव रोज़ एक से क्रिया कलापों को दोहराता हुआ , वही हर रोज़ दोनों समय दो रोटी के लिए नुक्ता चीनी, फिर […]
तेरी सुबह बङी निराली है.. तेरी शाम मधुर सुहानी हैं.. एे जानो जिगर से प्यारे वतन.. तेरे वैभव की अमर कहानी हैं वन्दे मातरम् वन्दे मातरम् वन्दे मातरम् है चरण पखावत सिंधु तेरे मस्तक पर […]
Aazaadi ki keemat hamne bahut badi chukaai hai Tab jaa kar hamne ye aazaadi paai hai Ye din hai bahut sunhaira, ye din hai bahut pavitra hindustaan ko aazaad rakhne ki ham sab ne kasam […]
जहाँ हिन्दू मिले जहाँ पर मुसलमान मिले उसे हिन्दूस्तान कहते हैं, जहाँ हर मज़हब को एक सा सम्मान मिले उसे हिन्दूस्तान कहते हैं। कहदो उससे जाकर जहां में हमारे मुल्क से अच्छा कोई मुल्क नहीं, […]
हम भारत मैं एकता की अखंड जोत जलायेंगै बहकावे में किसी के अब न हम आयेंगे दुख और मुश्किलों से अब ना हम घबरायेंगे रोटी एक हो या आधी मिल बांटकर हम खायेंगे अभी प्रेम […]
ना बिलखे भूख से ना कोई बच्चा नंगा रहे ना हो आतंक के साये ना कहीं कोई दंगा रहे मेरे भारत में चहुँ ओर बस प्रेम की गंगा बहे “आदि” का हो अन्त तब उसका […]
कुछ पंक्तिया मित्रो प्रेषित कर रहा हूँ नारी की विरह वेदना और समाज के कुरीतियों के बीच (एक छोटा प्रयास) काव्य सृजन ————————————————- इतना सम्मान सा शोर क्यों है क्यों नहीं मिटता बेइज्जती का दौर […]
https://ritusoni70ritusoni70.wordpress.com/2016/08/12 जीने की लय में, अभी सरगम बाकी है, बारिशो के बाद, इन्द्रधनुषी छटा आती है, चकाचौंध रोशनी न सही, अभी झरोखों से किरण आती है, जिंदगी कहीं न कहीं , अभी बाकी है । […]
????आजादी मुबारक हो???? ???????????? तोते पिंजरे जैसी बोली, खूब बढ़ी आबादी है, पंछी के पर काट दिए है, ये कैसी आजादी है। आजादी ये रूला रही है अब भी भूखे प्यासों को, जाने क्यों ये […]
कृपया राष्ट्र गान धुन में गायें ********************** तन मन धन न्योछावर कर दें तुम पर भारत माता विज्ञान ज्ञान भंडार भरें सब रखें सदा मन चंगा करुणा दया प्रेम रस बरसे नही हो देश में […]
पितरों के तर्पण को जैसे, थाली में खीर जरुरी है, भारत माँ के श्रृंगार को वैसे, ही कश्मीर जरुरी है| चमकी थी जो सत्तावन में, अब वो तलवार जरुरी है, प्यार मोह्हबत बहुत हो गया, […]
किसी अनजान बीहड़ में सुर्ख़ पत्तों से ढंका, एक लम्बा और संकरा रास्ता…. बहुत दूर से आता हुआ शायद अनंत से, खैर! पंहुचता तो होगा ही कहीं। या फिर, चलो देखते हैं आज चलकर .. […]
ये कविता मैने खुद को एक बार बचपन मे रख के,जवानी मे रख के और एक बार खुद को आखिरी सफर मे रह कर महसुस करते हुवे लिखा है,कि हमारे सैनिक भाई क्या सोचते है […]
आवो ! हम सब नमन करें भारत के वीर सपूतो का ! जिनने आज़ादी के हवन कुंड में अपना सब कुछ होम दिया आवो ! हम सब नमन करें भारत के वीर शहीदों का ! […]
रोशनी को चीर वही आकृति सहसा निकल गयी दरवाजों के मध्य और कहीं पीछे भी एक परछाई सी फिर खिल उठी कुछ धुंधली चांदनो सी एक घना कोहरा स्वयं को असहज दर्शाता शून्य वहां घर […]
नत मस्तक शीश झुकाए कतारबद्ध खडा हूं मैं लिए लघु हृदय वीरों संग दौड चला घावो की परवाह किए बिना तत्पर हूं कुछ करने को इस देश के लिए मरने को बना लिया है लक्ष्य […]
जितने भी ख़्वाब मेरे झूठ के बहाने निकले, उतने ही सच हकीकत के सिरहाने निकले। जितने दुश्मन मेरे घर के, किनारे थे मौजूद, उतने ही लोग ज़माने में, मेरे दीवाने निकले। ढूढ़ते रहे जिन्हें समन्दर […]
****जकड़ी है**** कुर्बानी से उपजी थी अब तस्वीरों में जकड़ी है, ऐ हिंद! तेरी आज़ादी सौ-सौ जंजीरों में जकड़ी है l हर मुफलिस की भूख ने इसको अपनी कैद में रख्खा है, […]
शत्-शत् नमन करें उनको , जो राष्ट्र-हित में शहीद हुए। जन-जन रो देता है सुन वे वीर गति को प्राप्त हुए। पुत्र खोने का दर्द भला माता से ज़्यादा कौन सहे! धन्य है वो माँ […]
स्वतंत्रता का नव विहान– गाओ मंगल गान! लहराते ध्वज को देखो- स्वाभिमान भरे मस्तक ऊँचे! याद करो वीरों की कुर्बानी! ज़ुल्म भरे व्यथा की कहानी। चहुदिश अरुण रश्मि छायी- धरती पर स्वर्ण-आभा आई ! बरस […]
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