अब तक सुलग रहा है उठ रहा है धुंआ धुंआ सा इक रिश्ता जलते जलते रह गया है जरा जरा सा कुछ बीज मुहब्बत के      सींचे थे घर के आंगन बिन खाद पानी पौधा     दिखता […]

आजादी चंद सिरफिरे ही थे जो लेकर आये थे उसे फिर उनसे हाथ छुड़ा जाने कहां खिसक गई अब सुनते हैं कि ठहरी है रसूखदारो के यहाँ जो आ रही थी मुल्क में रास्ता भटक […]

समेटता हूँ बिखरते ख्वाब को सजाता हूँ रोज तकदीर को लिखता हूँ और मिटाता हूँ | जो मद में चूर हो भूले है अपने ओहदे को आईना देकर उन्हे उनकी जगह दिखाता हूँ || हवा […]

फिरे तो सरफिरे है आग ही लगा देंगे पाक नापाक का नामो निशां मिटा देंगे | हमें ना खौफ कोई तोप या संगीनों का लडे तो ईंट से फिर ईंट ही बजा देंगे || भारत […]

बरसों पहले बंटी थी मरकज से गणतंत्र के नाम पर कोई आजादी जैसी चीज चंद गिने-चुने रसूखदारो के बीच ये सिलसिला फिर यूँ ही साल दर साल चलता रहा झोपडी का वो स्वराज डरा सहमा […]

इस मंच से जुड़े सभी काबिल रचनाकारों के नाम- ****उड़ान भरने दो**** अपनी आगोश में ये आसमान भरने दो, ये नये परिन्दे हैं,इन्हें उड़ान भरने दो l ये जिन्दगी जीने का हुनर सीख जायेंगे, ज़रा […]

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाये। गुलामी में भी हमारे दिल में देश की शान काफी थी, तोड़ देते थे होंसला अंग्रेजो का हममे जान काफी थी, पहनते थे कुर्ता और पाजामा खादी की पहचान काफी थी, […]

देख तिरंगे की लाचारी कैसे हर्शाएं हम आजादी पर कैसे नांचे कैसे झूमे गायें हम   भारत माँ का झंडा जब पैरों के नीचे आता है और जहाँ अफ्जालों पर मार्च निकाला जाता है जिस […]

ऐक हजारों धरती माता, ऐक ही आसमान, मजहब के झगड़ों में क्यूँ उलझ रहा इंसान, यही मैं सोच -सोचकर हैरान, यही मेै सोच-सोचकर हैरान, भारी -भारी पत्थर लेकर मंदिर रोज बनाते हैं, उस पत्थर में […]

पाकिस्तान की औखात को देखकर ये भाव उठे, कोई गलती हो तो क्षमा करना — जल जला उठा वो सैनिक, जिसमें जान बाकी है, लहु से श्रंगार कर दुंगा, बस यही अहसान बाकी है, काफूर […]

मैं आर देख रहा था, मैं पार देख रहा था, बंद लतीफों की खड़े -खड़े मल्हार देख रहा था, सोचा था तंग आकर लिखूंगा ये सब,मगर ये क्या, कागज के टुकडों में दफन विचार देख […]

तिरंगा। वस्त्र का टुकडा़नहीं, अस्मिता का मान है। ये तिरंगा विश्व में निज गर्व की पहचान है। केसरी ये रंग पराक्रम शौर्य है स्वाभिमान है। श्वेत वर्णी शान्ति की ये साधना का ध्यान है। ये […]

आजादी की शान तिरंगा। तोड़ तिलस्म अंग्रेजों की , लेकर आया नवविहान तिरंगा। शमां ए वतन की लौ  पर कुर्बान तिरंगा । हर हिन्दूस्तानी की जान तिरंगा। आजादी के इस पावन पर्व पर आओ मिल […]

यहाँ जिस्म ढकने की जद्दोजहद में… मरते हैं लाखों..कफ़न सीते सीते… जरा गौर से उनके चेहरों को देखो… हँसते हैं कैसे जहर पीते पीते… वो अपने हक से मुखातिब नहीं हैं… नहीं बात ऐसी जरा […]

लहू लुहान जिस्म रक्त आँख में चड़ा हुआ.. गिरा मगर झुका नहीं..पकड़ ध्वजा खड़ा हुआ.. वो सिंह सा दहाड़ता.. वो पर्वतें उखाड़ता.. जो बढ़ रहा है देख तू वो हिन्द का सपूत है.. वो दुश्मनों […]

लहू के हरेक बूँद से लिखी हुई कहानी है I मेरे हिन्द की आजादी की गाथा जरा निराली है II विश्वास की नदियाँ यहा, निश्छल सा प्यार था कभी रहते खुशी से सब यहा, न […]

कुर्बानी के दम पे मिली है आजादी •~•~•~•~•~•~•~•~•~•~•~•~• उनसे ज्यादा है किसी का कोई तो सम्मान बोलो जिसके आगे झुक गया है सारा हिन्दूस्तान बोलो मुक्ति के जो मार्ग पर निकले थे ले अरमान बोलो […]

नहीं तिरंगा मात्र ध्वजा ये जय का उदघोष भी है अमर शहीदों का प्रतीक बिस्मिल,भगत,बोस भी है उत्साह रगों में भरता यह क़ुरबानी को तत्पर करता हर देशभक्त हर राष्ट्रभक्त इस पर जीता इस पर […]

तीन रंगों से बना हुआ पहचान हमारी है सारे जग से प्यारा तिरंगा शान हमारी है आन, बान, सम्मान का सूचक राष्ट्रनिष्ठा और ज्ञान का सूचक प्रतीक ये अपने संविधान का है अपने अभिमान का […]

लहू है बहता सड़कों में आक्रोश है कुम्हलता गलियों में लफ़्जों मे है क्यों नफ़रत का घर आग है फैली क्यों फिजाओं में रंगो में है क्यों बारूद भरा क्यों दीये अंधेरों में रोते है […]

थप थप की आवाज से अचानक मैं चोंक गया इक मासूम सा बच्चा खड़ा था, मेरी कार के बाहर अपने कुछ तिरंगो के साथ बेचना चाहता था शायद कमाना चाहता था कुछ पैसे अपनी मां […]

काश! कोई तो रास्ता निकले. मुश्किलों से मेरा गला निकले. जान..छूटेगी.. उसके.. छूने से, जान आये तो मेरी जां निकले. लाख सदियों में तय नहीं होगा, फ़ासले.. इतने दरमियां निकले. कौन.. होता हूँ.. दोष दूँ […]

इस देश में अजीब किस्म की बात चल रही है, हिन्दू , मुस्लिम ,सिख ,ईसाई कहने को है सब भाई-भाई ख़ास तौर पर हिन्दू और मुस्लिमान इस कविता में न कोई ऐसा नाम हैं जो […]

देख तिरंगे की लाचारी कैसे हर्शाएं हम आजादी पर कैसे नांचे कैसे झूमे गायें हम   भारत माँ का झंडा जब पैरों के नीचे आता है और जहाँ अफ्जालों पर मार्च निकाला जाता है जिस […]

गीत आधार छंद-द्विगुणित चौपाई कुल ३२ मात्राएँ , १६-१६ पर यति ★■◆●★■◆●★■◆●★■◆●★■◆●★■◆◆●★■◆●★■◆●★ आओ तुमको ले चलूँ वहाँ, जिस जगह वीर इक सोया था । डोली थी सजी हुई लेकिन, वह आत्ममुग्ध सा खोया था । […]

गुलामी में भी हमारे दिल में देश की शान काफी थी, तोड़ देते थे होंसला अंग्रेजो का हममे जान काफी थी, पहनते थे कुर्ता और पाजामा खादी की पहचान काफी थी, गांधी जी के मजबूत […]

ये लहू कह रहा है कि भूल न जाना, न हम कर सके जो वो करके दिखाना, हम मिटे सरहदो पे कोई गम हमें नहीं इस हिन्द की आजादी का , न कोई मोल तुम […]

हिन्द के निवासियों धरती माँ पुकारती है उठ खड़े हो जाओ तुम माँ भारती पुकारती है धर्म, जाती-पाती से तुम बाहर आकर भी देख लो आजाद भारत में आज भी मजदूर बंधुआ बने देख लो […]

आतंकी की महिमा मंडित मंदिर और शिवाले खंडित पशु प्रेमी की होड़ है फ़िर भी बोटी चाट रहे हैं पंडित भ्रष्टों को मिलती है गोदी देशभक्त होते हैं दंडित सत्ता का हर इक दलाल बन […]

मिजाजे यार ने हैरत में डाल रखा है रकीबो से ये जो रिश्ता कमाल रखा है सुब्ह से शाम तलक ख्वाहिशों को पाला है ए ज़िन्दगी तुझे ऐसे संभाल रखा है देखा है वक्त ने […]

मन शंकित हो तो बढ़ना कैसा रण निश्चित हो तो डरना कैसा जब मान लिया तो मान लिया अब विरुद्ध चाहे स्वयं विभु हों जब ठान लिया तो ठान लिया अब सन्मुख चाहे स्वयं प्रभु […]

खल्क ये खुदगर्ज़ होती। आरही नज़र मुझे।। इंकलाब आयेगा ना अब। ये डर सताता अक्सर मुझे।। अशफ़ाक़ की,बिस्मिल की बातें। याद कब तक आएँगी।। शायद जब चेहरे पे तेरे। झुर्रियां पड़ जाएँगी।। क्या भूल गए […]

पंद्रह अगस्त का पावन दिन , वीरों की याद दिलाता है | शहीद हुए जो देश के खातिर , उनकी कथा सुनाता है | तेरह वर्ष की उम्र में आकर , चौदह कोड़े थे खाये […]

जितने भी थे फरेबी सियासत में आ गये बाकी बचे जो उनकी हिमायत में आ गये कानून को जो खेल समझते रहे सदा वो आज देख लीजे अदालत मे आ गये अब पाँच साल बाद […]

गीत बुलबुल सुनाती रही रात भर दिल में अरमां जगाती रही रात भर वादे गिनते रहे तेरे तारों के संग चाँदनी दिल जलाती रही रात भर ज़द पे किसने हवाओं की छोड़ा इसे शम’अ ये […]

ये लहू कह रहा है कि भूल न जाना, न हम कर सके जो वो करके दिखाना, हम मिटे सरहदो, पे कोई गम हमें नहीं इस हिन्द की आजादी का , न कोई मोल तुम […]

ताउम्र तलाशती रहती थी आॅखियाॅ जिनको वो ना मिला मुझे पूरे जहान् में जब पलकों को गिराकर ध्यान लगाया श्याम की सलोनी सूरत का फिर धीरे से उठाई पलकों की चिलमन तो श्याम सुंदर की […]

सुप्रभात ! शुभ दिवस !! आपका दिन मधुर और मंगलमय हो !!! रात को छत पर जाकर देखो.. चांदनी में ज़रा नहा कर देखो । चाँद को पास बुला कर देखो.. गीत सुहाना तुम गा […]

उसके सिर्फ दो बेटियाँ थी दोनों सरकारी स्कूल मैं पढती थी अबकी उन्हें सिर्फ बेटा ही चाहिए था लेकिन फिर से बेटी हो गई अभी आधा घंटा ही जी पाई थी अल्लाह को प्यारी हो […]

जीवन तो है आना जाना। अपने फर्ज कभी न भुलाना। अपने वतन पर मिटेंगे हम कभी न कदम पीछे हटाना। जो जां काम न आए वतन पर कैसे मां रा कर्ज चुकाना। आओ कदम बड़ाएं […]

जहाँ हमें मिलना था वहीं मिलते तो अच्छा था जहाँ दूरियां न होती नजदीकीयां होती वहीं मिलते तो अच्छा था जहाँ फूल खिलते बहारें होती वहीं मिलते तो अच्छा था जहाँ सपने न होते हकीकत […]

अपनी पड़ोसनों को किट्टी पार्टी में जाते जब भी देखती थी मन से कभी आह तो कभी गाली निकलती थी मुझे भी किट्टी पार्टी का भूत सवार था अब तो पतिदेव का जीना दुश्वार था […]

आजाद हैं हम या अफवाह है फैली चारों ओर आजादी की, जंज़ीरों में बंधी है आजादी या बेगुनाही में सज़ा मिली है आजादी की, हकीकत है भी हमारे देश की आजादी की, या बस गुमराह […]

**मेरी गज़लों में तुझे ढूढ रहे हैं ज़माने वाले**   मेरी गज़लों में तुझे ढूढ रहे हैं ज़माने वाले, अब कहां तुझको छुपाऊं छोड़ के जाने वाले l     कोई तो है जो इस […]

हो गए आज़ाद मगर क्या खोया क्या पाया है। आज़ादी के पंखों पर आतंक का गहरा साया है। शहीदों को श्रद्धांजलि सच्ची होगी यही अब के, कम न होने देंगे आन,शान अपना यही सरमाया है। […]

वही हर परेशानी की  सुबह, वही हर परेशानी की शाम, वही बिखरता हुआ मानव रोज़ एक से क्रिया कलापों को दोहराता हुआ , वही हर रोज़ दोनों समय दो रोटी के लिए नुक्ता चीनी, फिर […]