बेटा अपना अफसर है.. दफ्तर में बैठा करता है.. जी बंगला गाड़ी सबकुछ है.. पैसे भी ऐठा करता है.. पर क्या है दरअसल ऐसा है.. पैसे भी खूब लगाए हैं.. हाँ जी.. अच्छा कॉलेज सहित.. […]

उठो पथिक तुम्हे है दूर जाना, नदिया, सागर, पर्वत के पार जाना, ऊँची-नीची  डगर से मत घबराना । कितने ही चट्टान हो पथ में, लहरो ने है कब हार माना, बढ़ाते जाना और बढ़ते ही […]

बिन मौसम बरसात  हो, जब बिन मेघ वज्रपात, होता है तब मन में , पत्र  विहिन  वृक्ष के , दुुखो. का  एहसास । जब निर्विकार मन में , बोता है कोई विकृत बीज, आहत हो […]

ग़मों की छाव तले ये मेरी जिंदगी चले. मजबूरी ने कर दी है तार तार ओढनी, हर मोड़ पर लुटती हुई ये मेरी जिंदगी  चले. निराशा ने बुझा दिया है आशा का दिया, अँधेरे में […]

मै कभी भी तुमसे परेशान नही हो सकता, कभी नही,किसी सूरत मे भी नही। तुम कभी मुझे हैरान नही कर सकती, गर ऐसा हुआ, तो बहुत हैरानी होगी। तुम चाहे कुछ भी करो मुझे नाराज़ […]

मेरे ख्यालों में सिर्फ तेरी यादें हैं! जेहन में गूंजती दर्द की फरियादें हैं! ख्वाब की दरारों में भटकी है जिन्दगी, दिल के आईने में टूटती मुरादें हैं!   Composed By #महादेव

क्यों  रही ख्वाहिश एक लडके की ॥ हमेशा लडकी को कहाँ ॥ कभी चाँद कहाँ तो कभी गुलाब ॥ कभी जलता दिया तो कभी महकती फीजाए॥ चलती पवन तो कभी समुद्र का शाहील ॥ कभी […]

कल फिर गया था मैं घर की छत पर उस चांद को देखने इस उम्मीद में की शायद तुम भी उस पल उसे ही निहार रही होंगी देख रही होंगी उसपर बने दाग के उस […]

मन की बात खुदा ही जानें आँखें तो दिल की सुनती हैं, जिनसे पल भर की दूरी रास नहीं उनसे ही निगाहें लड़ती हैं, दिल भँवर बीच यूँ फँस जाता साँसें भी मुअस्सर ना होतीं, […]

हवाएँ मुस्कुराकर जब घटाओं को बुलाती है.. शजर मदहोश होते हैं..तुम्हारी याद आती है.. इन्ही आँखों का पानी फिर उतर आता है होठों तक.. भिगोकर होंठ कहता है..तुम्हारी याद आती है.. किताबें खोलने को जी […]

बारिश हो रही है तुम बार-बार देखती हो आकाश चमकती हुई बिजली को देखकर चिहुँक उठती हो जितने भूरे-भूरे काले-काले बादल हैं आकाश में ये समुन्दर का पानी पीकर धरती के ऊपर हाथी की सूंड़ […]

खिलते हैं दिलों में फूल सनम सावन के सुहाने मौसम में। होती है सभी से भूल सनम सावन के सुहाने मौसम में। यह चाँद पुराना आशिक़ है दिखता है कभी छिप जाता है छेड़े है […]

आया सावन खुशियाँ लेकर खुश हुई कुदरत बूँदें प् कर फ़ैल गयी चारों ओर हरियाली खिल गए फूल डाली डाली पायल चनका रही पावस रानी चालक गया नदियों से पानी चहचहा रहे हैं पंची दूर […]

1- है बहुत सख्त वक़्त के क़ैद खाने कि सलाखे, जिन्दगी लाख बन जाए पंछी – मगर उड़ नहीं सकती । 2- हकीकत से मुह मोड़ने का प्रयास तो देखो, अक्सर आईने तोड़ दिया करते […]

अधूरा गीत तुम बिन मेरे साजन बोलो कैसे ये जज़्बात लिखूँ, दिन मेरा कैसा बीता कैसे बीती रात लिखूँ। मन में उलझन भारी था तो ख़त तुमको ये लिख डाला, याद तुम्हारी दर्द लिखूँ या […]

एक ताज़ा ग़ज़ल के चन्द अश’आर आप हज़रात की ख़िदमत में पेश करता हूँ; गौर कीजिएगा… चाहता था जिसे जिन्दगी की तरह, वो रहा बेवफ़ा जिन्दगी की तरह। हाँ मेरा प्यार था बस उसी के […]

सुखों का रास जो रच ले वही मधुवन ज़रूरी है ! लबों की प्यास जो रख ले वही सावन ज़रूरी है !! बहुत हम बंट के रह आए हमें ये सोचना होगा ! जहॉ सब […]

ये प्यार हटा दो तुम दिल से कहीं धोखा ये दे जाये ना, कसमों वादों और बातों में कहीं रात गुज़र ये जाये ना, सच बोलूँ तो है प्यार बहुत कहीं आँखों से छलक ये […]

ღღ_कभी यूँ भी तो हो, कि दिल की अमीरी बनी रहे; फिर चाहे तो ज़िन्दगानी, ग़ुरबत में बसर कर दे! . कोई एक शाम फुरसत की, कभी मेरे लिए निकाल; फिर उस मुलाकात में ही, […]

  यह गीत धरा का धैर्य गर्व है, नील–गगन का यह गीत झरा निर्झर-सा मेरे; प्यासे मन का ….   यह गीत सु—वासित् : चंदन–वन यह गीत सु-भाषित् : जन-गण-मन यह गीत प्रकाशित् : सूर्य–बदन […]

कश्तियाँ समंदर को ठुकराने लगी है.. तुमसे भी बगावत की बू आने लगी है.. मत पूछिए क्या शहर में चर्चा है इन दिनों.. मुर्दों की शक्ल फिर से मुस्कुराने लगी है.. मैं सोचता हूँ इन […]

इल्ज़ाम तो बहुत लगे हम पर, मगर खता का कोई सबूत भी मिल जाता तो अच्छा था. जिन्दगी की राहों में लोग तो बहुत मिले , मगर उनमे से कोई अपना बन कर मिल जाता तो […]

कतरा-कतरा करके समन्दर निकाल दूंगा मैं, मैने तय किया है अपनी आंखें खंगाल दूंगा मैं ll मेरे सदमों का सबब तुम हो ये राज राज रहेगा, कोई गर पूछ भी लेगा तो टाल दूंगा मैं […]

पैसे की चाहत ने ॥ मन तो मेरा कोमल था ॥ तेरी चाहत ने खुदगरज बना दिया  ॥ हर रिश्ता अपना सा था ॥ बेगाना बना दिया ॥ शान्ति,नीद अपनी थी ॥ पर बीमारी के […]

देखना उनकी नियत भी बे-असर हो जायेगी, चालबाज़ी जब हमारी कारगर हो जायेगी. देखना है खेल मुझे साफ़ पौशाको का उस दिन, भोली जनता जब कभी भी जानबर हो जायेगी. बिगडे लोगो के लिए बिगडे […]

जी रहा हूँ तेरा मैंइंतजार करते करते! अब उम्र थक रही है ऐतबार करते करते! कबतलक मैं देखूंगा राह उम्मीदों की, खत्म हो रहा हूँ मैं प्यार करते करते! Composed By #महादेव

तेरी  बुराईयों  को  हर अखबार कहता है, और  तू  है  मेरे  गाँव  को गँवार कहता है. ऐ  शहर  मुझे  तेरी सारी औकात पता है, तू  बच्ची  को भी हुश्न-ए-बहार कहता है. थक  गया है वो […]

****बगावत कर लेंगे::गज़ल****   छुप के बैठे हैं कई अल्फाज़ मेरे होठों की तहों में, तुम कोई बात करोगे तो ये बेबात बगावत कर लेंगे l     बड़ी मुश्किल से मेरे हालात मेरे काबू […]

रहम करना ज़रा मौला, नमाजी हूँ तेरा मौला। तू ही तो मीत है मेरा, तू ही तो गीत है मेरा॥   किसी को गैर ना समझूं, किसी से बैर ना रख्खूं।। मेरा दिल बस यही […]

ऊंचाई कितनी ही मिल जाये परिंदे को मगर, बुझाने प्यास उसको भी ज़मीं पर आना पड़ता है। नहीं उड़ती पतंग भी हरपल आकाश में, उसे भी वक़्त आने पर कट जाना पड़ता है। ना ये […]

चलो चले … किसी नदी के किनारे किसी झरने के नीचें | जहाँ तुम कल कल बहना झर झर गिरना और… और मैं मंत्रमुग्ध हो झरनों की लहरों की अंतर्धव्नि से राग लेकर लिखता जाऊँगा […]

इक हाथ सम्हलती बोतल… दूजे में ख़त होता है… मैं रोज नशा करता हूँ… गम रोज गलत होता है… तरकश पे तीर चड़ाकर… बेचूक निशाना साधूँ… उस वक्त गुजरना उनका… हर तीर गलत होता है… […]

https://ritusoni70ritusoni70.wordpress.com/2016/07/04 वो   अनछुए   पल, जिनको मैंने जिया नहीं, उन्मुक्त जीवन की छटा थी, या  कि  नव  सृजन. की कपोल. कल्पित परिकल्पना । जो  भी  थी  मुमक्षा, विलय  होने  की , उनमें समा जीने […]

विविध उलझनों में जीवन फंसा हुआ है किंचित ही दिखने में सुलझे हुए है लोग | स्वार्थ की पराकाष्ठा पर सांसे है चल रही अपने बुने जंजाल में उलझे हुए है लोग || उपाध्याय…

विविध उलझनों में जीवन फंसा हुआ है किंचित ही दिखने में सुलझे हुए है लोग | स्वार्थ की पराकाष्ठा पर सांसे है चल रही अपने बुने जंजाल में उलझे हुए है लोग || उपाध्याय…

जमीं वही है मगर लोग है पराये से जो मिल रहे है लग रहे है आजमाये से! शफक नही नकॉब में फरेब है मतिहीन सभी दिखते मुझे हमाम में नहाये से!! उपाध्याय…

मस्जिदों में काश की भगवान हो जायें मंदिरों में या खुदा आजान हो जाये ! ईद में मिल के गले होली मना लेते काश दिवाली में भी रमजान हो जाये !! बाअदब मतिहीन मिलते मौलवी […]

चुभेगा पांव में कांटा तो खुद ही जान जायेगा जो दिल में दर्द पालेगा तड़प पहचान जायेगा | किसी की आह चीखों को तवज्जो जो नही देता जलेगा जब कदम अपना तपन वह जान जायेगा […]