रिमझिम रिमझिम वर्षा से, जब तन मन भीगा जाता है, राग अलग सा आता है मन में, और गीत नया बन जाता है I कोशिश करता है कोई शब्दों कि, कोई मन ही मन गुनगुनाता […]
रिमझिम रिमझिम वर्षा से, जब तन मन भीगा जाता है, राग अलग सा आता है मन में, और गीत नया बन जाता है I कोशिश करता है कोई शब्दों कि, कोई मन ही मन गुनगुनाता […]
आज कुछ हुआ है मेरे सनम को,-२ पास आके कहती है भुल जाओ हम को, आज कुछ हुआ.••••• यु नदी बन मुझे दुर तक बहाया लहरो मे अपनी मुझको मिलाया , अब यू किनारो पे […]
सामूहिकता से मिटे दुनिया के हर शूल ! निजता में सब बांटके करते भारी भूल!!
ღღ__कुछ इस तरह भी करता है “साहब”, वो मेरे दर्द का इलाज; . कि पहले घाव देता है, फिर अपने आंसुओं से धोता है!!…..#अक्स
हर बात ही हो लफ्जों से बयाँ ये जरूरी तो नहीं ‘हुज़ूर’, दिल ए नादाँ की कुछ सदायें तुम भी तो सुनना सीखो, हर नज्म़ में करता हूँ मैं बस तेरी […]
“जब चाँद भीगता था छत पर” बहका सावन-महकी रुत थी, ये हवा भी मीठी चलती थी. जब चाँद भीगता था छत पर, तब बारिश अच्छी लगती थी. वो बाल खुले बिखरे-बिखरे, होठों पे’ कभी आ […]
दिलो के गम छुपाये नहीं छुपते कभी अश्कों में, कभी लफ़्जों में निकल आते है वक्त बे वक्त और छोड़ जाते है निशानी खारी खारी सी, काली नीली सी
डरते डरते ही सही मैनें आखिर वो बात कह ही दी जो लफ़्जों में कभी ढल ना सके वो अहसास आज बयां हो ही गये मगर दिल अभी भी गमगीन सा बैठा हुआ है जो […]
Ashru-purit nayan mere kyu—? Raah tumhari takte nhi thakkti Shunya matra bin tere jivan ke pal “Preet” hamaari kahte nhi thakkti Manuhaar dil ki,sune tera dil bhi ‘Ummidein’ dil ki sahte nhi thakkti Gudgudate Mnn […]
अमरकंठ से निकली रेवा अमृत्व का वरदान लीए। वादियां सब गूँज उठी और वृक्ष खड़े प्रणाम कीए। तवा,गंजाल,कुण्डी,चोरल और मान,हटनी को साथ लीए। अमरकंठ से निकली रेवा अमृत्व का वरदान लीए। कपिलधार से गिरकर आई […]
ये दुनिया भी गज़ब का मेला, इतनी भीङ पर हर कोई अकेला, कभी हँसना,तो कभी है रोना, कुछ खोना,तो कुछ है पाना।। खिलखिलाते कुछ चेहरे हैं, कुछ ग़म छुपाते सेहरे हैं, सर पर छत नीले […]
ღღ__कल शब मिला था इक चाँद, हाँ “साहब” चाँद ही रहा होगा; . मिले भी तो दूर से, प्यार पर गुरूर से, और दोनों ही मजबूर से!!….#अक्स
टूटते ख्वाबों के अफसाने बहुत से हैं! मयकशे-जाम के भी बहाने बहुत से हैं! एक तू ही नहीं है तन्हा गम-ए-हालात से, शमा-ए-हुस्न के भी परवाने बहुत से हैं! Composed By #महादेव
।। सड़क का सरोकार ।। : अनुपम त्रिपाठी सड़कें : मीलों—की—परिधि—में बिछी होती हैं । पगडंडियां : उसी परिधि के आसपास छुपी होती हैं ॥ सड़कें : रफ्तार का प्रतीक हैं । पगडंडियां : जीवन […]
यूँ गयें हो दूर हम से जैसे कुछ था ही नहीं, लगता है पुरानी सोहबतों को भी तुम भूल गये हो, इतना भी आसान नहीं भूला देना किसी को, जुर्म मेरा है या फिर […]
मेरी तन्हाइयों का जिम्मेदार किसे मानूँ मैं ‘हूज़ूर’ तेरे जाने के बाद इन हवाओं नें भी तो रुख बदला था,
गलतफ़हमीं में जी रहे हो ‘हुज़ूर’ दर्द क्या होता हैं तुम्हें क्या मालूम, ज़रा पूछो उनसे जिनके अश्कों को पलकों का सहारा नहीं मिलता,
ღღ__ब-मुश्किल थपकियाँ देकर सुलाती है, नींद मुझको “साहब”; पर कुछ ना-समझ ख्वाब हैं उनके, जो बे-वक़्त जगा देते हैं!!…#अक्स
तेरे ही आसपास कल्पना कवि की है,…..! (गीत) तेरे ही आसपास कल्पना कवि की है, कल्पना कवि की है, वंचना कवि की है, वंचना कवि की है, वंदना कवि की है ……..! तू स्फूर्ति है […]
चला खुद को लेकर न जाने कहाँ …! चला खुद को लेकर न जाने कहाँ, अनजाना सफ़र ये, न जाना जहाँ ……! समझ जब ये आया, समझता हूँ मैं, जाना समझता न कुछ भी यहाँ. […]
कुछ बीते हुये वो दिन, कुछ भूली बिसरी यादें, कुछ पुराने से पलछिन, कुछ अधूरे से वादें ।। याद बहुत अाते हैं वो बीते हुए पल, वो मीठा सा रिश्ता,वो प्यार निश्छल, वो हमारा तुमको […]
समंदर तेज हो, तीखी हवा हो, पतवार छोटी हो, अगर तुम साथ हो मेरे , परवाह कौन करता है . …atr
मोहब्बत में जो मैंने की मोहब्बत से बहुत बातें , लबों पर रख के वो बोले बहुत बोला नहीं करते . …atr
मोहब्बत में चराग़ों से उजाले हुआ नहीं करते , दिलों में आग लगती है,जहाँ रंगीन दिखता है . …atr
ना मिट्टी से गढ़ी हूँ , ना तराशी हूँ पत्थर से, इंसानियत का अंश हू सींची गयी हूँ लहू से l दो नयन है सपनों से लबालब , ढूढ़ रहे हैं उस मंज़िल को, जहाँ […]
रोशनियाँ उसका पीछा करती रहीं और वह अंधेरों में छिपता रहा तन्हाइयों में खोता गया और सूरज से आँख मिलाने से डरता रहा दिन दिन न थे उसके अब रातों का उसको इंतज़ार रहने लगा […]
रोकर कोई न जंग जीता है न जीतेगा कभी , वक्त है यह वक्त से पहले न बीतेगा कभी l हाथों में काले से बस कुछ दाग ही रह जायेंगे, हाथों से परछाइयों को जो […]
निगाहें उठाकर जिधर देखते हैं तुम्हें बस तुम्हें हमसफर देखते हैं उडीं हैं गुबारों सी अब हसरतें भी खड़े हम तो बस रहगुजर देखते हैं न कर पाई आबाद शहरों की बस्ती तो वीरान […]
पगला सा ये मन मेरा, हो जाने को बैठा सिर्फ तेरा, तुझमें ही रम जाना चाहे, डगर कठिन हो कितनी भी चाहे। तुझ संग ये चाहे उङना, दुनिया में बेझिझक फिरना, खुशियों से झोली भरना […]
ღღ__मजबूरी में सुनने पड़ते हैं “साहब”, लोगों के ताने अक्सर; . कोई भी शख्स इस जहाँ में, शौक़ से रुसवा नहीं होता!!…#अक्स
पगला सा ये मन मेरा, हो जाने को बैठा सिर्फ तेरा, तुझमें ही रम जाना चाहे, डगर कठिन हो कितनी भी चाहे। तुझ संग ये चाहे उङना, दुनिया में बेझिझक फिरना, खुशियों से झोली भरना […]
मोहब्बत की गवाही देने लगती हैं धड़कने सुलझाने से सुलझ जाती है सब उलझने चाँद को पाने की हिम्मत आने लगती है ज़िंदगी में आती हैं जितनी अड़चने ! Like Comment
शांति ओढ़ लेना प्रतिरोध छोड़ देना ज़रूरी नहीं कायरता ही हो हो सकता है आने वाले संघर्ष की तैयारी हो बात बात में ताने देना देखने पर आँखे मटकाना बोलते वक़्त मुह बिचकाना ज़रूरी नहीं […]
दूर दूर तक कानों में ना कोई धड़कन, ना आवाज़ , ना ही थिरकन रक्त के संचार की , बस कथन, बंधन ,रुदन , आदेश , निर्देशन , चलते फिरते लोगों का जमघट, फिर भी […]
किताबे भी दर्द मे रोती हैं सिसकती हैं ,लहू लहान तेरे दर्द में होती हैं ************ वो चंद घंटे पहले शहर में उतरा ,शहर की कुछ गलियो मे घूमा सड़को को देखा ,जन्नत घूमा,रंग बिरंगे […]
ღღ__दुश्वारियाँ लाख सही लेकिन, गुफ्तगू करते रहो “साहब”; . मुसलसल चुप रहने से भी कोई, मसला हल नहीं होता!!…..#अक्स
मुकम्मल जिंदगी की खातिर क्या क्या न किया जिंदगीभर हमने मगर इक अधूरापन ही मिला जिसे साथ लिए घूमता रहता हूं मैं|
एक मित्र ने यही मुझसे ब्रम्हास्त्र की फरमाइश की थी तो जी लीजिये जी पेश है खुद से जो पूछा कि क्या चाहिए दिल बोला कि फिर वो समां चाहिए वो बहती हवा वो […]
ღღ__कौन-सी दुनिया में रहते हो, तुम आज-कल “साहब”; . जो सपनों में भी तुम तक, मेरी आवाज़ नहीं जाती!!….#अक्स
बड़ी बेदर्द सी रातें है काफ़ी सुन के सोता हूँ, जहाँ तुम याद आती हो , वहीं चुपके से रोता हूँ| ये रोने और सोने का नहीं है सिलसिला लेकिन , कहीं जब दर्द आँखों […]
जापान से बुलेट ट्रेन लाने की ज़रूरत नहीं है बुलेट ट्रेन हम भी बना सकते हैं और चला सकते हैं अगर जापान से कुछ लाना ही है … तो उनकी आदतें लाई जाएँ उनकी सांस्कृतिक […]
टेक्नोलॉजी कैसे आएगी ——––—-/–/——-// टेकनोलॉजी कैसे आएगी इस देश में जब तर्क को आस्था के डिब्बे में बंद कर दिया गया हो … जब विज्ञान को धर्म के तले दबा दिया गया हो जब देश […]
बदलते रहे वही नज़रें बार-बार हमने तो बस अपना चश्मा बदला राजेश’अरमान”
कितना होता है गुरूर इंसान को ये करता अपनों से दूर इंसान को जिसको देखो वही मद में चूर है वक़्त देता सबक जरूर इंसान को राजेश’अरमान’
इतना भी मुश्किल तो न था मुश्किल कहने में जो देर लगी राजेश’अरमान’
लो फिर मौसम बदला फिर तेरी याद आई राजेश’अरमान’
खुद से अंजान आदमी पूछता जनाब आप कौन राजेश’अरमान’
अब तो धब्बों की भी नुमाइश होती है बस चर्चे में रहने की खवाइश होती है ज़िक्र उसका भला क्यों करता जमाना यहाँ तो सुर्खिओं की परस्तिश होती है राजेश’अरमान’
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