रिमझिम रिमझिम वर्षा से, जब तन मन भीगा जाता है, राग अलग सा आता है मन में, और गीत नया बन जाता है I  कोशिश करता है कोई शब्दों कि, कोई मन ही मन गुनगुनाता […]

“जब चाँद भीगता था छत पर” बहका सावन-महकी रुत थी, ये हवा भी मीठी चलती थी. जब चाँद भीगता था छत पर, तब बारिश अच्छी लगती थी. वो बाल खुले बिखरे-बिखरे, होठों पे’ कभी आ […]

डरते डरते ही सही मैनें आखिर वो बात कह ही दी जो लफ़्जों में कभी ढल ना सके वो अहसास आज बयां हो ही गये मगर दिल अभी भी गमगीन सा बैठा हुआ है जो […]

अमरकंठ से निकली रेवा अमृत्व का वरदान लीए। वादियां सब गूँज उठी और वृक्ष खड़े प्रणाम कीए। तवा,गंजाल,कुण्डी,चोरल और मान,हटनी को साथ लीए। अमरकंठ से निकली रेवा अमृत्व का वरदान लीए। कपिलधार से गिरकर आई […]

ये दुनिया भी गज़ब का मेला, इतनी भीङ पर हर कोई अकेला, कभी हँसना,तो कभी है रोना, कुछ खोना,तो कुछ है पाना।। खिलखिलाते कुछ चेहरे हैं, कुछ ग़म छुपाते सेहरे हैं, सर पर छत नीले […]

टूटते ख्वाबों के अफसाने बहुत से हैं! मयकशे-जाम के भी बहाने बहुत से हैं! एक तू ही नहीं है तन्हा गम-ए-हालात से, शमा-ए-हुस्न के भी परवाने बहुत से हैं! Composed By #महादेव

।। सड़क का सरोकार ।। : अनुपम त्रिपाठी सड़कें : मीलों—की—परिधि—में बिछी होती हैं । पगडंडियां : उसी परिधि के आसपास छुपी होती हैं ॥ सड़कें : रफ्तार का प्रतीक हैं । पगडंडियां : जीवन […]

यूँ गयें  हो  दूर  हम  से  जैसे  कुछ  था  ही   नहीं, लगता है पुरानी सोहबतों को भी तुम भूल गये हो, इतना भी आसान नहीं भूला देना किसी को, जुर्म मेरा है या फिर […]

तेरे ही आसपास कल्पना कवि की है,…..! (गीत) तेरे ही आसपास कल्पना कवि की है, कल्पना कवि की है, वंचना कवि की है, वंचना कवि की है, वंदना कवि की है ……..! तू स्फूर्ति है […]

चला खुद को लेकर न जाने कहाँ …! चला खुद को लेकर न जाने कहाँ, अनजाना सफ़र ये, न जाना जहाँ ……! समझ जब ये आया, समझता हूँ मैं, जाना समझता न कुछ भी यहाँ. […]

कुछ बीते हुये वो दिन, कुछ भूली बिसरी यादें, कुछ पुराने से पलछिन, कुछ अधूरे से वादें ।। याद बहुत अाते हैं वो बीते हुए पल, वो मीठा सा रिश्ता,वो प्यार निश्छल, वो हमारा तुमको […]

रोशनियाँ उसका पीछा करती रहीं और वह अंधेरों में छिपता रहा तन्हाइयों में खोता गया और सूरज से आँख मिलाने से डरता रहा दिन दिन न थे उसके अब रातों का उसको इंतज़ार रहने लगा […]

  निगाहें उठाकर जिधर देखते हैं तुम्हें बस तुम्हें हमसफर देखते हैं उडीं हैं गुबारों सी अब हसरतें भी खड़े हम तो बस रहगुजर देखते हैं न कर पाई आबाद शहरों की बस्ती तो वीरान […]

पगला सा ये मन मेरा, हो जाने को बैठा सिर्फ तेरा, तुझमें ही रम जाना चाहे, डगर कठिन हो कितनी भी चाहे। तुझ संग ये चाहे उङना, दुनिया में बेझिझक फिरना, खुशियों से झोली भरना […]

पगला सा ये मन मेरा, हो जाने को बैठा सिर्फ तेरा, तुझमें ही रम जाना चाहे, डगर कठिन हो कितनी भी चाहे। तुझ संग ये चाहे उङना, दुनिया में बेझिझक फिरना, खुशियों से झोली भरना […]

मोहब्बत की गवाही देने लगती हैं धड़कने सुलझाने से सुलझ जाती है सब उलझने चाँद को पाने की हिम्मत आने लगती है ज़िंदगी में आती हैं जितनी अड़चने ! Like Comment

शांति ओढ़ लेना प्रतिरोध छोड़ देना ज़रूरी नहीं कायरता ही हो हो सकता है आने वाले संघर्ष की तैयारी हो बात बात में ताने देना देखने पर आँखे मटकाना बोलते वक़्त मुह बिचकाना ज़रूरी नहीं […]

दूर दूर तक कानों में ना कोई धड़कन, ना आवाज़ , ना ही थिरकन रक्त के संचार की , बस कथन, बंधन ,रुदन , आदेश , निर्देशन , चलते फिरते लोगों का जमघट, फिर भी […]

किताबे भी दर्द मे रोती हैं सिसकती हैं ,लहू लहान तेरे दर्द में होती हैं ************ वो चंद घंटे पहले शहर में उतरा ,शहर की कुछ गलियो मे घूमा सड़को को देखा ,जन्नत घूमा,रंग बिरंगे […]

एक मित्र ने यही मुझसे ब्रम्हास्त्र की फरमाइश की थी तो जी लीजिये जी पेश है   खुद से जो पूछा कि क्या चाहिए दिल बोला कि फिर वो समां चाहिए वो बहती हवा वो […]

बड़ी बेदर्द सी रातें है काफ़ी सुन के सोता हूँ, जहाँ तुम याद आती हो , वहीं चुपके से रोता हूँ| ये रोने और सोने का नहीं है सिलसिला लेकिन , कहीं जब दर्द आँखों […]

जापान से बुलेट ट्रेन लाने की ज़रूरत नहीं है बुलेट ट्रेन हम भी बना सकते हैं और चला सकते हैं अगर जापान से कुछ लाना ही है … तो उनकी आदतें लाई जाएँ उनकी सांस्कृतिक […]

टेक्नोलॉजी कैसे आएगी ——––—-/–/——-// टेकनोलॉजी कैसे आएगी इस देश में जब तर्क को आस्था के डिब्बे में बंद कर दिया गया हो … जब विज्ञान को धर्म के तले दबा दिया गया हो जब देश […]

कितना होता है गुरूर इंसान को ये करता अपनों से दूर इंसान को जिसको देखो वही मद में चूर है वक़्त देता सबक जरूर इंसान को राजेश’अरमान’

अब तो धब्बों की भी नुमाइश होती है बस चर्चे में रहने की खवाइश होती है ज़िक्र उसका भला क्यों करता जमाना यहाँ तो सुर्खिओं की परस्तिश होती है राजेश’अरमान’