मिथ्याओं पर आधारित है साहब ! सोंच तुम्हारी अब तो सारी बातें हैं लगती झूँठ तुम्हारी मेरी अभिलाषा का है तुमने जो उपहास किया मेरी करुण व्यथा का है तुमने जो अपमान किया ना कभी […]
मिथ्याओं पर आधारित है साहब ! सोंच तुम्हारी अब तो सारी बातें हैं लगती झूँठ तुम्हारी मेरी अभिलाषा का है तुमने जो उपहास किया मेरी करुण व्यथा का है तुमने जो अपमान किया ना कभी […]
तेरी खामोशियां आज भी गीत गाती हैं लबों पर मेरे मुस्कान आती हैं रात थम जाती है उस वक़्त जब भी तेरी याद आती है ।।
नायक अपनी नायिका के प्यार मे पड़ा हुआ कुछ पक्तियों के माध्यम से अपने इम्तिहान ए मोहब्बत की सच्ची दास्तान बताता है – सोचता हूँ कि कहूँ ना कहूँ दास्तान ए मोहब्बत की कुछ बुरा […]
नायिका के प्यार में पड़ा हुआ नायक सुंदर पक्तियों के माध्यम से अपने दिल के जज्बातों को बयां करता है – सोचता हूँ कि कहूँ ना कहूँ दास्तान ए मोहब्बत की कुछ बुरा मानेंगे तो […]
सिक्सर कौन लगायेगा कौन नाम बनायेगा किसके सिर पर सजेगा ताज यह अब तय हो जायेगा सही गिरेगी गुगली या स्विच हिट लग जायेगा बाउंसर गुजरेगी कानों से या हुक शॉट खेला जायेगा क्या गेंद […]
खूबसूरत सुबह तुझे प्रणाम है मेरा, सूर्य की रश्मियों को आज प्रणाम मेरा। खिल रही दिशाएं चहकते खग वृंदों, चमकती ओस बूंदो तुन्हें प्रणाम मेरा। तुम्हें प्रणाम मेरा।
मायूसियों ने मेरा, पता ढूॅंढ लिया है लगता है अब हम को, बदलना पड़े ठिकाना । मायूसियाॅं देने लगी हैं दर्द ज्यादा, अब यहाॅं रहने का नहीं है कोई फ़ायदा। सामान अपना उठाकर, हम रुख़सत […]
माफी एक हुनर है, सत्य अहिंसा का पूरक है, राम कृष्ण ईशा को प्यारा है, बच सकते है शान तुम्हारे बिगड़े काम बने तुम्हारे झुक कर देखो एक बार, बागों में फूल खिले रोज तुम्हारे, […]
माफी तो मजबूत का, गुण होता है नेक, कमजोरों की मदद को, उठ तू जगा विवेक। उठ तू जगा विवेक, दिखा मत नाड़ी का बल, यह बल हो कमजोर, तुझे फिर रौंद न दे कल। […]
साहित्य है सबके लिए, यही समाज का है दर्शन। रुचिकर भी हो पढ़ने में, हो उस काल का दर्पण। जीवन की समस्याओं पर भी करे विचार, ऐसा हो साहित्यकार। कठिनाइयों पर विजय पाने की, नैराश्य […]
साहित्य है केवल वह रचना, जिससे प्रकट हो समाज की सच्चाइयाॅं। भाषा और शिल्प भी उत्तम हो, दिलो-दिमाग पर असर डालने का हो गुण समाज का भला हो, हो यही भावना । प्रस्तुत करे जीवन […]
21 मार्च के बाद, प्रथम पूर्णिमा के पश्चात आने वाले पहले रविवार ईस्टर संडे मनाया जाता है। गुड फ्राइडे के बाद, आने वाला प्रथम रविवार ईस्टर संडे कहलाता है। उषा काल में महिलाओं द्वारा, की […]
मित्रता में राम हो मित्रता में श्याम हो बस अंगुली पकड़ के चलने दो दिल में अपने रहने दो, सत्य वचन, सत्य के प्रेमी, ना बड़बोला, हक है इतना सब कुछ कहना, स्व हित परहित, […]
सावन तुमसे माफी है माफी दिनकर कालिदास के बच्चों से है, काफी दिन मै दूर रहा दूर कारण- फोन मेरा चोरी हुआ था, अभी फोन लिया नही पर सावन तुमसे दूर हुआ नही, कहां गए […]
सूरज जलकर कब रोया संध्या रातों मे कब सोई गुलमोहर का साख से झरना कब बंद हुआ दशरथ माझी का हथौड़ा कब बंद हुआ, क्यों रोता है मूरख बंदे सत्य प्रकृत , प्रकृत अनोखा, बस […]
ख़ास लोग जिन्दगी के, दिल की धड़कन जैसे हैं। दिखते नहीं हों चाहे वो, जिन्दगी के ख़ामोश सहारे से हैं। दिल की धड़कन के बिन जैसे, वजूद नहीं है जीवन का वैसे ही उनके बिना, […]
रास्ते की दूरियों से, फ़र्क नहीं पड़ता है कोई। बस, दिलों में दूरियाँ न होनी चाहिएं। एक सुखद सन्देश से ही, मन हो जाता है प्रसन्न बस, वह सन्देश हमें मिलते रहना चाहिए। दोस्त बनाते […]
अक्सर मंदिर के पुजारी व्यक्ति को जीवन के आसक्ति के प्रति पश्चताप का भाव रख कर ईश्वर से क्षमा प्रार्थी होने की सलाह देते हैं। इनके अनुसार यदि वासना के प्रति निरासक्त होकर ईश्वर से क्षमा याचना […]
ज़िन्दगी के सफर में कई हमराह मिलते हैं। कहीं पे वाह मिलते हैं कहीं पे आह मिलते हैं।। सफर में इश्क़ के कुछ विरले होते हैं जिन्हें आखिर में भी आकर मंजिल – ए- चाह […]
मनुष्य सोचता है मंजिल दिखे तो , तब मैं मेहनत करूँ। मंजिल सोचती है मेहनत करे तो उसे झलक दे सकूँ। ऐसे में जिसने कर्मपथ को अपना कदम है बढ़ाया, उसी ने हमेशा मंजिल को […]
ज़िन्दगी के सफर में कई हमराह मिलते हैं। कहीं पे वाह मिलते हैं कहीं पे आह मिलते हैं।। सफर में इश्क़ के कुछ विरले होते हैं जिन्हें आखिर में भी आकर मंजिल – ए- चाह […]
निष्ठा ना कमजोर कभी करना प्रभु, नेक रस्ते पर ही हो चलना प्रभु। भूलकर भी किसी का दिल ना दुखाऊॅं, ऐसा आशीष मुझको देना प्रभु। दिल दुखाना चाहे यदि कोई और मेरा, उस राह पर […]
ये जो जिन्दगी है ना, बहुत ख्वाब दिखाती है। कुछ ख्वाब होते हैं पूरे, तो कुछ अरमान मिटाती है। तोड़ कर दिल कभी किसी का, उसको आंसू पिलाती है। कभी किसी को, बिन प्रयास ही […]
जय श्री सीताराम —————————— आज-न कल सबको सच की डोर में बँधना है झूठ गिराता, सच उठाता पूर्ववत् कर्म नर को बहकाता पर दृढ़-संकल्प ही नर को बचाता ——————————————— आज-न कल सबको सच की डोर […]
चंद दिनों का मेहमान यहाँ सब फिर जाना है सबको उसके दर आज किसी की बारी है, कल और किसी को जाना है, परसो अपनी बारी है .. ———————————– चंद दिनों का मेहमान यहाँ सब […]
जय श्री सीताराम ——————— दुनिया लूटी अपनी करतुत से मैं लूटा अपनी विचार से कोई लूटे तो लूटे, अपनी करतूत से पर कोई ना लूटे, अपनी संस्कार से ।। (प्रवाह) —————————————- सब खेले होली खुद […]
जय श्री सीताराम ———————— जीना जरूरी है, मरना कायरों का काम है . प्रण का टूटना स्वाभाविक है, फिर भी उठना वीरों का काम है .।।1।। ————————————————- आलस मन और सुस्त तन उसका है, जिसने […]
दुख की बदली छाई है मेरे सर पे सुख की चाह करता नहीं रब मैं तुम से तु चाहे जैसे रख ले, अपनी शरण में मैं वैसे रह लूँ, तेरी शरण में ——————————————– मेरे मालिक, […]
शुक्रवार का ही दिवस था, यीशु के बलिदान का दिन, सूली पर चढ़ गए, उस महान इन्सान की याद का दिन। शत्-शत् नमन है ईसा मसीह को मसीहा था जो इन्सानियत का एक पवित्र आत्मा […]
सम्मान और स्थान, बनाना किसी के दिल में आसाॅं नहीं है लेकिन, इतना भी कठिन नहीं है। थोड़ा सा त्याग करो गर, निज स्वार्थ से हो कर परे। कभी किसी के लिए भी सोचो, ऐसी […]
क्यूं ना थोड़ा सा, अलग बनें। खुश रहने की सलाह, बहुत दी.. अब खुश रहने की वजह बनें। मिटा कर किसी के, ह्रदय का संताप फिर अपने ह्रदय की खुशी को माप। खिलाकर किसी गरीब […]
तू न समझे बस यही दुआ है मेरी, समझ में अक्सर दिल जला करते हैं। तू नासमझ है और न ही तू समझना कभी , न दिल मेरा लगे तुझसे और , न तू लगाना […]
बुरी आदत मेरी नजरअंदाज मत करना मुझे बता देना। सच में गर मित्र हो, सुधार करने को मुझे बता देना। गीत कोई तुम्हें लगें कर्कश मेरे, भाव मेरे कहीं पर दुखाएँ दिल तेरा गर, मुझे […]
दूर कर देना बुरी आदत मेरी मेरे मौला, किसी को दर्द न दूँ बल्कि उत्साह दूँ मेरे मौला। बह रहा हो हताशा की नदी में गर कोई, उसे उबार लूँ वो शक्ति दे मेरे मौला। […]
ऊपर वाला बिना वस्त्रों के भेजता है, जन्म के वक्त निःवस्त्र भेजता है। ताकि आप ढक सको नेकी के वस्त्रों से अपना तन, प्रेम से आच्छादित कर सको अपना मन। नेकी जरूरी है, नेकी से […]
कहना सरल होता है निभाना कठिन, अगर ठान लो तो नहीं कुछ कठिन। केवल कहो मत कर्म करते रहो रुको मत कहीं पर चलते रहो। किसी का बुरा मत सोचो कभी भी, इज्जत बराबर करो […]
नभ में तारे चमक रहे हैं, चन्द्रमा भी दमक रहे हैं। निशा की है शान निराली, सुबह के गए घर लौट रहे हैं। पंछी भी वापस नीड में आए, निशा की गोद में चैन पाएं। […]
सूर्य किरण सुधा समान, पौधों को कराती रसपान विटामिन डी इनमें विद्यमान, सूर्य इसीलिए पूजित हैं जीवनोदक इनकी रश्मियाँ, प्रदान करें आलोक, इस लोक को.. सुनहरी किरणों से l सूर्य के दर्शन हों हर रोज़ […]
नव प्रभात है बीती निशा उठ कर करो पूर्ण अपनी आशा, स्वप्न करने को पूरे, आया है दिवस सुनहरा l रात भर जो देखे स्वप्न, आओ पूरे करते हैं l उठा तूलिका परिश्रम की, उल्लास […]
नव प्रभात सजा है नई किरण आशा की लेकर यह प्रभात सजा है। फूल खिले हैं गमलों में आतुर हैं मिलने किरणों से चिड़ियाओं के नैन लग रहे छोटे से हिरनों से।
गीत लिखते रहूँ मैं सुनाते रहूँ, सो गए को जगाते रहूँ। गर उठें भाव टूटन के मन में बन रबर मैं मिटाते रहूँ। निराशा हटाते रहूँ, आशा जगाते रहूँ, प्यार भावना को जगा मैं मुहब्बत […]
सुगंध के लिए इत्र पास रखिये कठिन समय के लिए मित्र पास रखिये। विपत्ति में हौसला रखिये, हँसी-मजाक का भी शौक सा रखिये। दुखों को आप हल्के में रखिये अन्यथा रोज सकते में रहिए। ईश […]
बना दो बिगड़ी सबकी मेरे सरकार सब सर नवाते हैं, तेरे दर पर मेरे राम कोई तुझसे क्या माँगे, तुम किसी को क्या देते हो राम जो देते हो तुम वो दुनिया नहीं देते है […]
बदनामी का भय, न मान-हानि का डर . वहीं है जग में सबसे ज्यादा प्रसन्न ।।1।। —————————————————— मन-माया से उपर है ब्रह्म । नर ही नारायण है, जब नर को ना हो मन-माया से डर […]
सुगंध के लिए इत्र पास रखिये कठिन समय के लिए मित्र पास रखिये। विपत्ति में हौसला रखिये, हँसी-मजाक का भी शौक सा रखिये। दुखों को आप हल्के में रखिये अन्यथा रोज सकते में रहिए। ईश […]
तेरे अंतस् में सखी उठा है जो भी ताप कल वह सब बुझ जाएगा जब आएगा नवल प्रभात इच्छा यह मेरी है कि विजय होगी तुम्हारी जिस कारण तुम रूठी वह बातें मिथ्या सारी तेरी […]
ऐ रात ! सो जा जरा कल होगा नया सवेरा जिसमें उगेगा परिश्रम का सूरज धूमेगा धरा को निज अवकाश पर जायेगी ईष्या मिट जाएगी तेरी हर शंका…
आदमी आज परेशान इतना क्यों है, लुटा सा देखता अरमान क्यों है, खुद के घर में बना मेहमान क्यों है, इंसान है तो फिर बना हैवान क्यों है। धड़कता दिल बना बेजान क्यों है, जानता […]
रे मन ! तू परोपकार कर निज तन की तू थोड़ चाकरी मानवता कर रे मन ! तू परोपकार कर अपने दु:ख को थोंड़ मनुष की सेवा तू कर रे मन ! तू परोपकार कर […]
रानी लक्ष्मीबाई ने भारत से किया प्राणों से बढ़कर प्रेम देश की खातिर कर दिया प्राणों का भी होम प्राणों का भी होम करके यह देश बचाया अंग्रेजों के आगे कभी ना सिर को झुकाया […]
Please confirm you want to block this member.
You will no longer be able to:
Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.