‘मेरी वफाओं का खुलकर सिला दिया उसने, न रखा एक भी, हर खत जला दिया उसने.. दूर होने का फैसला क्या खुद तुम्हारा है ? मैंने पूछा तो कैसे सर हिला दिया उसने.. हमें भी […]

यदि नारी से निर्माण हुआ है नया संसार। फिर क्यों नारी पे हुआ घोर अत्याचार।। हम कहते है नारी होती है ममता के सागर। फिर क्यों हुआ बाजार में आज ममता बेकार।। आंचल में हम […]

मनु की संतान पर तंज कसने की कोशिश की है मैनें.. नया विषय और भारत की समस्याओं की ओर आपका ध्यान आकर्षित करने की चेष्टा की है मैनें… द्वापर छोंड़ दुर्योधन और दुःशासन कलयुग में […]

‘यही हकीकत है मेरी, मैं उम्मीद-ए-जहाँ का पुलिंदा था, मैं तब तक मरता रहा, जब तक कि मैं ज़िंदा था..’ – प्रयाग मायने : उम्मीद ए जहाँ – दुनियाँ की उम्मीद पुलिंदा – ढेर

नसीब सबका है अपना – अपना , कहीं ख्वाब परवान चढ़े, कहीं हुआ झूठा कोई सपना। ज़िन्दगी में जो मिला, वो भी कुछ काम ना था। ऐसा भी नहीं है, कि कोई ग़म ना था। […]

‘जा चुका होता मैं कब का इस जहाँ से, किसी से किये वादे, गर अधूरे नही होते.. वो किया करते हैं औरों के ख्वाब मुकम्मल, जिनके खुद के ख्वाब कभी पूरे नही होते..’ – प्रयाग […]

शब्दों की सीमा लांघते शिशुपालो को, कृष्ण का सुदर्शन दिखलाने आया हूं,                                  मैं देश दिखाने आया हूं।। नारी को अबला समझने वालों को, मां काली का रणचंडी अवतार याद दिलाने आया हूं,                          मैं […]

‘वो हादसा के सलीके से जिसका ज़िक्र नही, और कुछ लोग थे जो सुर्खियों में आते रहे.. मदद के वास्ते लाज़िम थे कई हाथ मगर, वो सारे हाथ फकत वीडियो बनाते रहे..’ – प्रयाग मायने […]

प्रथम मौलिक जन-जन के गुरु प्रबंधन के पुरोधा,नवाचार की शुरू आस्था के आकाश पर सूर्य से बिराजमान हैं धर्म के धरातल पर रचे कृतिमान हैं मातृभक्ति की वज़ह से पिता की भी की अवहेलना पिता […]

कुछ पाना हमारा मकसद न हो देने की लत खुद को लगाते चलें जीवन हमारा यह रहे न रहे दूसरों का जहाँ चलो बसाते चले । हमने देखा दुनिया की भीड़ में भी हम अकेले […]

यह शहर अनजान सा लगने लगा है तू नहीं तोह बेगाना सा लगने लगा है वह चाय की टपरी वह गालिया आज भी भरे है तू नहीं तोह सब कुछ बेजान सा लगने लगा है […]

साक्षात्कार था मेरा उस दिन, चिंता से था हृदय धड़कता। एक दस का नोट पड़ा जेब में, ऑफिस तक की भी बस कैसे पकड़ता। दो सौ रुपयों की दरकार थी, ज़िन्दगी से मेरी तकरार थी। […]

आज तू हंस ले , खुलकर मुझ पर, मगर ,थोड़ा सा सब्र कर; अरी; सुन ! मेरी अभागी क़िस्मत! मैं सीख तुम्हें सीखलाऊंगा, मेहनत की जंजीरों से जकड़कर, मुलाजिम तुम्हें बनाऊंगा। मुलाजिम, तुम्हें बनाऊंगा! ——मोहन […]

महामारी का दौर यह कैसा आया , वक़्त ने सबको बेबस बनाया , कुदरत ने इस धरती को बहुत खूबसूरत बनाया , पर इन्सान इस नेमत को सम्भाल ना पाया , तो महामारी ने आकर […]

संवेदनाएं कहाँ रहती हैं आज-कल, मैं यह जानती नहीं.. लोग क्यों जलाते हैं नफरत के चिराग मैं यह जानती नहीं.. ऊब चुकी हूँ जिन्दगी से अपनी, साँसों की डोर कब टूटेगी मैं यह जानती नहीं… […]

‘निकलती है नेक मकसद को, मुकम्मल वो दुआ होती है, नही होती दुआ अकेली कभी, साथ क़ुव्वते-दुआ होती है..’ – प्रयाग मायने : मुकम्मल – पूरी क़ुव्वते दुआ – दुआ की ताकत

कितनी प्यारी होती हैं बेटियाँ, प्रेम की मूरत होती हैं बेटियाँ.. आती है जब परिवार पर आँच कोई, सबसे आगे खड़ी होती हैं बेटियाँ… प्यार के पालने में झूलती हैं, माँ के आँचल में पल्लवित […]

बुद्धि विनायक पार्वतीनंदन ,मंगलकारी हे गजबंदन वक्रकुंड तुम महाकाय तुम ,करता हूँ तेरा अभिनंदन कंचन -कंचन काया तेरी ,मुखमंडल पर तेज समाया है मूषक वाहन करो सवारी ,मोदक तुमको प्यारा है भक्ति भाव में तेरी […]

‘मेरे इज़हार पर कुछ यूँ लगा तू हाँ की मुहर, दुनियाँ देखे कि इकरार किसे कहते हैं.. तेरे सिवा मुझे उस पर भी यकीं है ऐ खुदा, हूँ मुतमईन के ऐतबार किसे कहते हैं.. किसी […]

‘देर न लगी मेरी हकीकत के मायने बदलने में, मैं दरिया था कभी मोहब्बत का, आज दिल्लगी का ज़रिया हूँ..’ – प्रयाग मायने : ज़रिया – साधन

चलो ‘मैं’ को, ‘मैं’ से लड़ाते हैं! जीतकर , फिर ‘मैं’ से ‘हम’ बनाते हैं। विशेष–> यमक अलंकार का प्रयोग एक “मैं ” अपने आप के लिए दूसरा ” मैं ” अहंकार के लिए

कर्म अपने हाथ में है और बाकी कुछ नहीं, एक ईश्वर की है सत्ता और बाकी सच नहीं। जो मुझे यह दिख रहा है अपने चारों ओर का, एक सपना सा है यह सब और […]

पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगाकर प्रेम दिखाती है बिन मांगे अपनी झोली हमेशा ही भरा पाती है हर चीज समय से जुड़ी है प्रत्येक जगह यहां जलीय चक्रीय प्रवृति से भरा है सारा ही जहां […]

कोपलें फूटी अनेकों पेड़ बन पाये नहीं, झाड़ियां उग आई मन में बेर लग पाये नहीं । स्वाद था मीठा सभी में जीभ में परतें जमीं थी इसलिए मीठी नजर महसूस कर पाये नहीं। इस […]

बीती रात अंधेरे की अब नई रोशनी आई है, मेरी कलम मेरे आगे इक नया विधेयक लाई है। कहती है अपनी वाणी से ऐसी कविताएं लिखना जिसने नव उत्साह जगे, बस ठेस किसी को मत […]

प्रातः की सुंदर बेला में सबसे पहले ईश्वर को धन्यवाद करना है जिसने नया सवेरा दिखलाया । फिर माता व पिता के चरणों को छूकर प्रणाम करें, जिन्होंने जीवन देकर के यह संसार हमें दिखलाया […]

ख़्वाबों का क्या है आ ही जाते हो तुम बेशक़ रातों को जगा जाते हो तुम वह प्यार ही क्या जिसमे तड़प ना हो वह आग ही क्या जिसमे तपन ना हो अब तोह आग […]

शीर्षक:- पिता:-बरगद का वृक्ष पिता वह बरगद का वृक्ष है जिसकी छांव में हमें प्रेम, स्नेह तथा सुरक्षा मिलती है.. पिता नारियल का वह फल है जो ऊपर से सख्त परन्तु अन्दर से सुकोमल होता […]

गणेश वंदना – श्री गणेश वंदन | गौरी नंन्द्न शंकर सूत करे सब श्री गणेश वंदन | हाथी मस्तक मंगल दस्तक तेरा सत अभिनंदन | मूषक वाहन लड्डु भोग करते सदा भक्त निरोग | धूप […]

इंसान इंसान से डरने लगा अदृश्य जीवों से मरने लगा, ज़िन्दगी महकती थी जिन लोगों से कभी, उनसे मिलने से मुकरने लगा। वो दौर ना रहा, ये दौर भी जाएगा, गया वक्त फिर लौट के […]

‘ऐ मेरी याद-ए-उल्फत सुन, तू इतना काम कर देना, जो उसको भूलना चाहूँ, मुझे नाकाम कर देना.. सुबह का वास्ता किससे, सहर की राह किसको है, तू उसकी ज़ुल्फ़ के साये मे मेरी शाम कर […]

हे नियंता! दैव! प्रकृति! मानव जाति विकट विपदा में है, चारों तरफ रोग फैला है, इससे निजात दिला। चीन के वुहान से निकल कर पूरी दुनियां को चपेट में ले लिया, जिंदगी ठप्प कर दी, […]

कुछ देर पहले तक बातें कर रहे थे वे, कुछ ही पल बाद, उखड़ गई सांसें। हल्की सी उल्टी, का बहाना था, गायब हो गई धड़कन। शून्य शून्य शून्य शून्य में विलीन हो गए। यही […]