जीवनदायिनी चीजें ही तो अक्सर प्रचूरता में जिंदगानी ले लेती है अग्नि नित सब का चूल्हा चलाती भोजन को कितना मधुर बनाती अधिकता में स्वाद को ही मिटाती अनजाने में घर तक भी जलाती जल […]
जीवनदायिनी चीजें ही तो अक्सर प्रचूरता में जिंदगानी ले लेती है अग्नि नित सब का चूल्हा चलाती भोजन को कितना मधुर बनाती अधिकता में स्वाद को ही मिटाती अनजाने में घर तक भी जलाती जल […]
मुझे समझने की कोशिश मत करना, मैं उलझा-सा कोई जाल हूं, जितना सुलझाओंगे , उतना ही उलझ जाओगे अगर सुलझा लिया तो, फिर खुद को ही भूल जाओगे।
ये राजनीति बड़ा ही मीठा जहर, मानवता पर बड़ा ढहाती कहर , होते दंगे ,बिखर जाती लाशें, फिर मिडिया हमारी, दिखाती दलाली, हाए! हिन्दू मर गया , हाए! मुस्लिम मर गया, पर कौन बताए? और […]
‘ज़िंंदगी को इतनी हसरत से नही देखा कभी, जितनी तेरा साथ पाने की है मुझमे आरज़ू..’ – प्रयाग
क्या तुम कभी यह भूल पाओगे क्या फिर कभी वापस आ पाओगे शायद तुम्हे आना पड़े, मजबूरी में मजबूरी बहुत कुछ करवाती है यह ही इन्सान को भटकाती है कैसे भूलोगे तुम, इस मीलों के […]
तुम कुछ बोलो ना बोलो, पर मुद्दे सारे सुलझ गए, सुनो देश के ग़द्दारों तुम गलत जगह पर उलझ गए । है तकलीफ तुम्हे ये के ‘अर्णब’ ने चिट्ठा खोल दिया, जो दूजा ना कह […]
‘बुझा गया है कोई, मैं चिराग था पहले, जो जगह आज बंज़र है, बाग था पहले.. बदल ली करवट कुछ इस कदर तकदीर ने, डरता हूँ आज धुएँ से, मैं आग था पहले..’ – प्रयाग
कठिन पथ पे चलकर, फतह हासिल करने की तू प्रतीक बन जा ! स्वमेहनत से कुछ ऐसा कर, सभी के मन की तू मुरीद बन जा ! अनेक रंगों से सजे, संग- संग गुजारे खट्टे- […]
बस अब और नहीं, गये अब दिन तुम्हारे हैं हमने हंस हंस के, जो अपनाये अंगारे हैं ये अंधेरे में सने पूनम की जो रातें हैं दिये तुमने, पर यही अब संग हमारे हैं । […]
एक छोटा सा सपना पूरा हुआ जब मेरा बेटा आर्यन आया तोतली सी बोली से जब तुमने मुझे पापा बुलाया दिल के सारे दर्द दूर हुए जब नन्हा चेहरा मुस्कुराया तू मेरा लाडला राजकुमार मेरा […]
‘उन्वान-ए-किताब-ए-ज़िन्दगी था रखा कुछ और, लिखा कुछ और, छपा कुछ और, दिखा कुछ और, पढ़ा कुछ और..’ – प्रयाग मायने : उन्वान ए किताब ए ज़िन्दगी – ज़िन्दगी की किताब का शीर्षक
कविता- बहन ——————- पता उसे तेरा बसेरा, डाल पे किससे होता है| यह भी पता था आना जाना, कब कब तेरा होता है| बोल सकी ना तेरे कारण, भैया तुझको कहती है| देख हंसी को […]
निकल ही गई ,जान मेरी! जब नन्हीं-सी जान , पहली बार बीमार हुई। औरों को भी थी गमी, पर आंखों से मेरी, बेमौसम बरसात हुई, नहीं था होश, मुझे ना जाने , कितनी बैचैनियो की […]
‘बेवजह ही है मुझसे जुड़ी हर उम्मीद तेरी, क्या तेरे दिलो-ज़ेहन में खयाल नही उठता.. मैं छोड़ आया हूँ अभी-अभी समंदर को, तेरी झील का रुख करने का सवाल नही उठता..’
चश्मे वाले नेताजी! गजब कमाल करते हैं, करोड़ों जनों को चुना लगाने का; जिगरा सरेआम रखते हैं , ना खाऊंगा ना खाने दूंगा! ऐसे-ऐसे वादे तो; वो खुलेआम करते हैं, चश्मे वाले नेता जी , […]
पत्थर का दिल कभी पिघलता नहीं इसलिए तो इसमें गुमान भी नहीं होता। तभी तो इसकी पूजा होती, हर घर में नित सम्मान हीं होता।।
‘मैं गुनहगार ही सही उनका फकत लेकिन, मैं शाद हूँ कि किसी तरह उनका तो हूँ..’ – प्रयाग मायने : फकत – सिर्फ शाद – खुश
‘कैसे रोकेगा मेरे इरादों को ये उफान-ए-समंदर, आतिश को दबाए रखा है आगज़नी के लिए..’ – प्रयाग मायने : उफान-ए-समंदर – समुद्र का उफान आतिश – चिंगारी
आज कल के इस माहौल में, जहां जिम (व्यायाम – शालाएं) बंद हो चुकी है। तो हमें घर पर ही योगाभ्यास करना चाहिए।इसी संदर्भ में मेरी एक प्रस्तुति…… योग करें, सब योग करें रहने को […]
ना जाने बसता कहाँ * ———-*——–*——–* सङको पे चलता कहाँ वह संक्रमण से अनजान है भय व भूख को साथ लिए वो भी एक इन्सान है जानता है यह सफ़र शायद हो अंतिम सफ़र चल […]
माना कुछ बुराईयां है मुझमें, मगर सारी अच्छाईयां नहीं है तुझमें, फर्क इतना-सा , मैं हुबहु कहता, और तू बनाकर।
जिससे ठोकर लगी मेरी, एकाएक वो पत्थर बोला! माना गिरे हो तुम, मगर इतने भी नहीं गिरे हो तुम, जो गिरते ही रहोगें हरदम।
मेरे भारत के युवक जाग आलस्य त्याग, उठ जाग जाग तेरी मंजिल कुछ पाना है, पाने तक चलते जाना है। सोने को तो रात बहुत है क्यों तू दिन में सोता है, दिन में सब […]
‘उँगली उठा तो दी हमने, पर साबित क्या करेंगे, वो तमीज़दार भी इतने हैं कि पत्थर खुद नही फेंकते..’ – प्रयाग
‘वो मेरी बेबसी का इश्तिहार देने निकले हैं, बतौर वजह सुर्खियों में कहीं खुद भी न आ जाऐं वो..’ – प्रयाग मायने : बतौर वजह – वजह के तौर पर
‘न देखा उसने इक दफा भी कभी, के किन तूफानों से घिर गया हूँ मैं.. उसकी शिकायत है आज भी वही मुझसे, कि अपने वादों से फिर गया हूँ मैं..’ – प्रयाग
कितना नादान था वह बचपन जब… माँ मुझे चाँद की कटोरी में खिलाती थी… मैं खाना खाने में नखरे हजार दिखाती थी… पर माँ चाँदनी रात में कटोरी में जल भर लाती थी.. मेरी बाँहें […]
पिता बरगद का साया है, मां ममता की छाया है। जीवन में दोनो ही का, स्नेह मैंने पाया है। एक भी ना हो जीवन में, वो जीवन किसको भाया है। जहां मां का दिल कोमल […]
हमने कभी बयां नहीं किया, आदत नहीं थी गम बताने की। वो भी नहीं समझे दर्द मेरा, यही सज़ा मिली गम छिपाने की।
युग युग से तू ,आंसू बहाती आई पुरुष के अधीन तू, सदा रहती आई अपने घर, अपने बच्चो के लिए युग युग से तू ,मर मिटती आई क्या नारी तेरी यही कहानी ? आंचल में […]
जिधर ले जा रही उधर जा रहे और चाहती क्या है तु जिदंगी।
जिंदगी में ये हुनर भी आजमाना चाहिए, अपनों से हो जंग तो हार जाना चाहिए। और शायरी पढ़े : ज़िन्दगी शायरी
‘आओ कुछ बेहतर करते हैं.. कुछ बाहर जग की परिधि में, कुछ अपने भीतर करते हैं.. आओ कुछ बेहतर करते हैं.. आओ कुछ बेहतर करते हैं.. ये विकट समय की बेला है, दरकार नही साधारण […]
कब से तुम्हारी राह में नजरें बिछाए बैठे हैं। चले भी आओ कि महफिल सजाए बैठे हैं।।
मैं सैनिक हूं, मैं देश को संभालता हूं, हर रोज मृत्यु को मारता हूं, मैं मौत से नहीं डरता हूं, मौत को तो मुठ्ठी में लेकर चलता हूं, परिवार की चिंता नहीं करता हूं, परिवार देश […]
कौन कहता है, पुरुषों के जीवन में रौशनी नहीं है। उनकी अर्धांगिनी की बिंदिया क्या रौशनी से कम है।।
खामोश हम भी थे तुम भी थे और यह ख़ामोशी रिश्ते को खत्म कर गई दोनों एक दूसरे के लिए तड़पते रहे पर यह ख़ामोशी दोनों को रास आ गई सारे वजूहात छोटे थे पर […]
बाबा जी मैं जपूं तेरा नाम सांई नाम की अलख जगा ले भोली सी सूरत अपने मन में बिठा ले सच्चा प्यारे सांई नाम बाबा जी जपूं मैं तेरा नाम कृपा दृष्टि की तेरी माया […]
शैतान की नानी, बन्दर-सी शैतानी, जादू की पुड़िया, सोने की गुड़िया, परियों सी रवानी, प्रेम की निशानी, बालों को नोचे, कान को खींचे, शरारतें उसकी मन को भाएं, थकान का आलस पल मे उड़जाए, बेटी […]
चार दिन की जिंदगी है चैन से जीना है, बीड़ी-सिगरेट जहर हैं इन्हें नहीं पीना है।
ये न समझ कि रोड़ी फोड़ कर गुजारा करता हूँ तो ऐसा-वैसा ही हूँ , मैं भी इंसान हूँ, भीतर-बाहर ठीक तेरे जैसा ही हूँ।
‘हर आग से वाकिफ हूँ मैं, हर वक्त मैं जला हूँ, वो क्या जलाएगी मुझे, मैं आग में पला हूँ..’ – प्रयाग
एक ऐसा जहाँ, देवी नहीं बस इंसान समझा जाता हो देवी का दर्जा देके न छल, नारी से किया जाता हो। आसमां पे बिठा के अस्तित्व पर भी बन आया है बाहर तो क्या घर […]
हिम्मत न हार, जीत पा कदम बढ़ा, कदम बढ़ा मंजिलें स्वयं तेरे कदम पे लोट जायेंगी। राह है कठिन मगर तू हौसला भी कम न रख हौसले को देखकर राहें सिकुड़ सी जायेंगी। अवरोध की […]
‘दे दे कोई तदबीर मुझे हरकत में रहने की, मैं उसके तसव्वुर में तस्वीर हुआ जाता हूँ..’ – प्रयाग मायने : तदबीर – तरकीब/उपाय तसव्वुर – सोच/विचार
बरस रहा है भाद्रपद रिम-झिम बरसता जा रहा है इस मनोरम मास में गौरा-महेश्वर सज रहे हैं। इन पहाड़ों के शिखर शिवलिंग जैसे लग रहे हैं, गौरा-महेश्वर पूजने घर-घर विरुड़ भीगे हुए हैं। नारियां बाहों […]
ए दोस्त सोचो,अगर राह में रोड़े न होते। जीवन के परिभाषा, हम कैसे समझ पाते।। यही रोड़े सभी को जीवन धारा बदल दिया। वरना संसार के इस सैलाब में हम कहाँ होते।। ठोकर पे ठोकर […]
हे प्राणदायनी नारी ************* हे प्राणदायनी नारी,तेरी करूण कहानी आँचल में है करूणा,पर आखों में पानी । हर युग में क्यू नारी ही सतायी जाती है विरह वेदना सहती,अग्नि में उतारी जाती है कदम -कदम […]
युग युग से नारी पुरुष के हाथों, छलती आई। तभी तो नारी आज की साक्षात देवी कहलाई ।। —प्रधुम्न अमित
‘मेरी वफाओं का खुलकर सिला दिया उसने, न रखा एक भी, हर खत जला दिया उसने.. दूर होने का फैसला क्या खुद तुम्हारा है ? मैंने पूछा तो कैसे सर हिला दिया उसने.. हमें भी […]
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