पत्थर पे लकीर, खींचने वाले। खुद को किया, तुझको हवाले।। संवार दे तू , या बर्बाद कर दे। जो भी दे, हंस हंस के दे।
पत्थर पे लकीर, खींचने वाले। खुद को किया, तुझको हवाले।। संवार दे तू , या बर्बाद कर दे। जो भी दे, हंस हंस के दे।
साजिशें भी थीं, सामने गुनहगार भी थे। जवाब हमारे पास, तैयार भी थे। हम चुप रह कर सब सहते रहे, थोड़े नादान ही सही हम,मगर थोड़े समझदार भी थे।
विश्वास में विष भी है, और आस भी है। धोखा मिले या घात,ये तो अपने नसीब की बात है
आज धरा से मिला आकाश ,तो अच्छा लगा। नन्हीं – नन्हीं बूंदों से हरी हो गई घास ,तो अच्छा लगा। तल्ख़ हो जाए ,कुछ बातों से जब दिल, कोई दे जाए बातों की मिठास , […]
तेरी दुआओं को सलाम, तेरी वफाओं को सलाम। तेरे दर से जो आई, उन हवाओं को सलाम।
क्यों कुछ कहते नहीं, सब गूंगे बहरे बैठे हैं , सबके भीतर जलती है आग, फिर क्यों खामोश बैठे हैं, खो दिया है सम्मान को , अपने भीतर के इंसान को, तभी तो चुप ही […]
चलो छुपा कर रखते हैं, खुशियों के बीज , बो देंगे कभी; अगर गम बढ़ जाए, ज़रा हंस लेना तुम , और हम भी मुस्कुराएं
कितना चले !कितना रुके! , हम जिंदगी के सफर में , ये कोई नहीं पूछता , मगर लोग अक्सर पूछते हैं, मंजिल के कितने करीब हो!
हर शाम इतनी मीठी ना होती, अगर तुम ना होते , खुश तो होते हम, पर खुशनसीब ना होते, गुजारिश है बस इतनी तुमसे, इस मुस्कान को खोने मत देना, खुशनुमा किया है हृदय को, […]
प्रेम ऐसा शब्द है जो दिलों को जोड़ता है, प्रेम के पथ का पथिक सच्ची खुशी को भोगता है। प्रेम नफरत से बड़ा है, जिन्दगी का सार है यह, प्रेम बांटों प्रेम पाओ वेद का […]
संसार मे दुख-सुख लगे रहते हैं मत घबरा मनुज। जिंदगी से प्यार खुदकुशी मत कर मनुज। गम मिले जिस राह पर उस राह को तू त्याग दे, आस मत रख दूसरे से जी स्वयं के […]
कितनी व्यथा है तुम्हारी जो कम होने का नाम ही नही लेती, आंख मेरी नम कर जाती रोटी से शुरू हुई पलायन तक गई पर मौत पर जा कर रुकी तुम्हारी उदर-ज्वाला संग जंग आंख […]
ए हमजोली जरा बता तो सही कहाँ गए वो दिन । रह नहीं पाते थे कभी हम एक दूसरे के बिन।। वो कसमे वादे वो हसीन ख्यालों के मीठा ख्वाब। आज वक्त के साथ सभी […]
किसी भी आलोचक के लिए सबसे अहम उसका आलोचनात्मक विवेक होता है | इस गुण के बिना आलोचक कवि या काव्य की आत्मा में प्रवेश ही नहीं कर सकता है | आचार्य राम चन्द्र शुक्ल […]
क्यों निभा रहे हैं हम, इस झूठे रिश्ते को, जहां वो हमें अपना नहीं मानते, और हम उन्हें पराया नहीं।
थाम कर तुम्हारा हाथ , आज भी चलना चाहते हैं, चाहे दूरी कितनी भी हो, साथ निभाना चाहते हैं।
कुछ इस तरह चला; यू मोहब्बत का सिलसिला, ना तुमको इसका एहसास था, ना मुझको इसका गम, हम दोनों मसरूफ रहे, इसे बेवजह निभाने में।
नन्हे से बच्चे को जब सड़क पर चाय बेचते देखती हूं इक बहन सिसकती है मां रोती है मेरे अंदर
यह कहक़हा लगा कर , मुझे झुकाकर कहां चल दिए। मेरी धूमिल आंखों से ओझल होकर, सच को झूठ बनाकर कहां चल दिए। मैं थी बेकसूर, तुम कसूरवार, ठहरा कर कहां चल दिए। मैं मांगती […]
नारी तुम पर कविता लिखने को वर्णांका असफल है मेरी तुम तो जीवन की जननी हो सब कुछ तो तुम ही हो मेरी। माँ बनकर जन्म दिया मुझको यह सुन्दर सा संसार दिखाया, अच्छी-अच्छी शिक्षा […]
जाग उठ जा, अब पथिक पूरा सवेरा हो गया है, देख ले खिड़की से बाहर सब अंधेरा खो गया है। क्या पता क्या थी कशमकश नभ-धरा के बीच में रात भर का प्रेम रण वह […]
क्यूँ बारम्बार किया जाता महिलाओं के साथ घृणित अपराध, कयी तरह की वेदना-संताप से गुजरती,जिनसे होता बलात्कार । हर कानून बौना सावित, हर जायज कोशिश जा रही बेकार, थमता दिखता नहीं, दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा […]
यह न समझो हम कभी रोये नहीं आसुंओं से चेहरा धोए नहीं। पी गए भीतर ही भीतर अश्रुजल बस दिखावे के लिए रोये नहीं।
ओढ़ लो छतरी भरी बरसात है, आंसुओं से भीग जाओगे कहीं। मेघ अब भी हैं घुमड़ते वक्ष पर इसलिए छतरी बिना आओ नहीं।
अंधेरा इतना भी नहीं था कि रोशनी में अपनी जगह बना सके, और रोशनी भी इतनी नहीं थी कि अंधेरे को मिटा सके,
तुम्हें तुम्हारी ताजगी मुबारक , मुझे सुखें पत्तों से प्यार है, तुम्हें नाज है अपनी खूबसूरती पर , मुझे तेरी सीरत से प्यार है, तू खुश है इस नएपन से, मुझे तेरी नादानी से प्यार […]
माँ तुम्हारे चरणों को धोता है हिन्द सागर। बनके किरीट सिर पे हिमवान है उजागर।। माँ….. गांवों में तू है बसती खेतों में तू है हँसती गंगा की निर्मल धारा अमृत की है गागर।। माँ…. […]
‘इस कदर गुज़रेंं हैं हम इश्क के दौर से, दिल धड़कता है यहाँ, सदा आती है कहीं और से..’ – प्रयाग मायने : सदा – आवाज़
पत्थर को पत्थर से मारे तो क्या मारे ए दीवाने । दिल को जरा शीशे बना कर वार करो तो जाने।।
कुछ तो बेबसी रही होगी, जो राहों पर निकल पड़ा मज़दूर। ना साधन है ना रोटी है,, निज घर जाने को मजबूर। कुछ सपने लेकर आया था शहर, वो सपने हो गए चकनाचूर । कड़ी […]
हां मान लेता हूं , अब नहीं होता ,पहले जैसा, बार-बार वो इजहार करना , मगर मैं उस कस्तूरी-सा जो कपड़ा फट जाए , मगर खुशबू नहीं छोड़े।
प्रकृति की सुन्दरता इसलिए है कायम इसे कभी किसी से इश्क नहीं होता न ही ये कभी किसी के लिए रोता इसलिए शायद सबका प्यारा होता चांद और सितारे सदा थे और रहेंगे पेड़ पौधे […]
तपती धरती पर पड़े, जब बरखा की फुहार, सोंधी सुगन्ध से महके धरती, ठंडी चले बयार। मयूर नाचे झूम – झूम कर, बुलबुल राग सुनाए, तितली प्यारी आए सैर को, कोयल कुहू – कुहू गाए। […]
बेवफाई के बाजार में ए दोस्त वफाई नहीं मिलती। सब है यहाँ धोखेबाज़ कोई प्रेम कली खिलती तो कैसे खिलती ।।
तिनके से सिया ने रावण को डराया, तिनके में राम का स्वरूप दिखाया। श्रद्धा हो तो तिनके में भगवान बसते , नहीं तो मूर्तियों में ही पाषाण दिखते। तिनको से पक्षियों का घर बन जाता, […]
यूँ ना बाँटो नफ़रतों की पर्चीयां, गीत मोहब्बतों के भी लिखे जायेंगे। सितम चाहे कितने, भी कर लो, फूलों की ज़िद है, खिल ही जायेंगे। इतिहास जब भी, पढ़ा जाएगा, दर्शन आपके हर बार, किये […]
कभी खामोशी के साथ , चार कदम चल कर तो देखो ! अपने वजूद का एहसास; पल भर में हो जाता है।
बदल कर रख दी मैंने अपनी सारी आदतें , मगर तुम पत्थर ही रहे..
हम काटते ही नहीं , बुराइयों की जड़ें, पालते हैं ,पोषते हैं , कभी इच्छाओं के लोभ से, कभी रूपयों की चाह से, जब लगता है , वह जड़े हमें बांधती है, हम उठ खड़े […]
आंखों को बंद करने से, दुखों का मंजर छुप नहीं जाता। तब और उभर कर नजर आती है, उनकी गहराईयां।
होश अब नहीं रहा इंसानियत का, बेसुध से सब हो गए हैं , जाने कैसा है यह नशा अपने भी गुम हो गए हैं।
एक दिन दिल ने जब कहा , वहाँ दग़ाबाज़ों का बसेरा है। नादान चाहत से तब मैं कहा , संभल वहाँ जरूर कोई सपेरा है।।
कोयले को हीरा बनाने वाले। टूटे हुए तारे को चमकाने वाले।। शिक्षक हो आप। अंधेरे को रोशनी दिखाने वाले।। कोरे कागज में रंग भरे। रंगो को आकार दिए।। आकारों से शब्द,शब्दों से धर्म बनाने वाले। […]
हर जख्म छिपा करके हंसने की कोशिश कर रहा हूं| काश समझ लिया होता उसे भी, जो अब समझने की कोशिश कर रहा हूं|
अपनों का साथ मिले तो, हार में भी जीत है। अपनों का साथ हो तो, हर दिवस ख़ुशी का गीत है। है निशा का अन्धकार तो, एक दीपक साथ निभाएगा । तिमिर से अब भय […]
न बैठो दिल में मेरे इस तरह से आशा बन, कहीं न पा सकूं तो, दुःखी रहेगा मन। तुम्हारे साथ बिना रह नहीं सकता, तुम्हीं हो सांस मेरी तुम ही दिल की धड़कन।
अंधेरी रात में आशा एक चिराग हो तुम, इस बियाबान में संगीत का एक राग हो तुम।
कभी कहते थे जरा धीरे चल कभी कहते थे जरा सम्भल कर चल जनाब अब मौका यह है कि सब कहते है जरा चल तो सही इतनी थमी भी तो ठीक नहीं थोड़ा संतुलन बना […]
Meri Choti si koshish! You make me laugh You make me happy Because of you I smile You ease all problems for a while When thick clouds cover me With all darkness and thunder You […]
वक्त थम सा गया, और ज़िन्दगी चलती रही। तेरी याद बहुत आई, तेरी कमी खलती रही। फ़िर ढूंढ़ने निकल पड़े तुझे, आंख के आंसू मेरे। खैर, तू मिला नहीं, पर मिलने की आस पलती रही।
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