हां, झूठी है औरत, अपनी ख्वाहिश तक ही नहीं सीमित, औरों के लिए जगे रात तक हां, झूठी है औरत। मायके की तारीफ़ करे ससुराल में, ससुराल की कमी ,ना बताए किसी हाल में। कोशिश […]
हां, झूठी है औरत, अपनी ख्वाहिश तक ही नहीं सीमित, औरों के लिए जगे रात तक हां, झूठी है औरत। मायके की तारीफ़ करे ससुराल में, ससुराल की कमी ,ना बताए किसी हाल में। कोशिश […]
कुंदन सी निखर गई, टूटे मोती सी बिखर गई। अंतर्मुखी सब कहने लगे, सबका कहना सह गई मैं, जल – धारा सी बह गई मैं ।
अजीब सी है ये ज़िन्दगी, कभी, फूलों सी कोमल लगी। कभी शमशीर की धार हुई, दिल के जज्बातों को जब- जब किया बयां, एक कविता हर बार हुई ।
ऐ ज़िन्दगी सुन, शिक्षक दिवस मुबारक हो, तू भी मेरी गुरू है, बहुत कुछ सिखा दिया ।
तराशने वालों ने, पत्थर को भी तराशा है, नदानों के आगे हुआ, हीरे का भी तमाशा है।
अच्छे इंसान की भी एक आदत बुरी पाई, हर किसी को समझा अच्छा, बस यही मार खाई ।
आज फ़िर याद आई वो, एक सखी मेरे बचपन की । जब भी मैं उसके घर जाती थी, कई – कई घंटे बिताती थी । समय का पता ही ना चलता था, छुट्टी का दिन […]
इस तरह क्यों भेद का तुम भाव रखते हो, बताओ, मैं तुम्हारी ही तरह इन्सान हूँ इंसान समझो। मुफलिसी है श्राप मुझ पर बस यही है एक खामी, अन्यथा सब कुछ है तुम सा एक […]
आपको लगता है क्या मैं चाँद हूँ या चाँदनी रात के झुरमुट में बैठी हूँ मैं कोई अप्सरा गीत हूँ या हृदय की टूटी-फूटी रागिनी… आपको लगता है क्या.. अमरत्व का वरदान हूँ या करुणत्व […]
हर क्यूं का जवाब नहीं होता, हर जवाब लाजवाब नहीं होता । यूं तो हम ख्वाब देखते हैं बहुत सारे, पर, हर ख्वाब तो पूरा नहीं होता ।
उम्मीद की लौ रोशन रहे, ये जीवन जीने की चाह कहे। ना हो कभी ना उम्मीद मनुज, अवसाद की पीड़ा भी ना सहे।
कितनी बार लिखता और फिर फेक देता कागज़ का टुकड़ा तुझे लिखते समय खुदा भी लिख कर मेरे लिए तुझे, फेख दिया होगा टुकड़ा कही
नातियाँ धरातल तक पहुंचें बेरोजगारी पर नया करो कुछ यह सबसे प्रमुख मुद्दा है इस मुद्दे पर किया करो कुछ। देखो ! देश के नौजवान कैसे सड़कों पर भटक रहे हैं, रोजगार का संकट सिर […]
इन्सानियत को हमने रुलाया है आज डर ने मुकाम दिल में बनाया है मंदिर से अधिक मधुशालाएं हैं ऐसा बदलाव अपने देश में आया है ये वस्त्रहीन सभ्यता अपने देश की नहीं पर्दा ही आज […]
सुबह सुबह में चलो साफ करें अपने घर और दिल को साफ करें, सोहती फेर लें, पोछा लगा के साफ करें अर्श से फर्श तक न दाग रहें। यदि कहीं लूतिका ने जाल बुन के […]
आज का यह भारत प्रतिफल है उनके अथक प्रयासों का सावित्री बाई फूले जो थी शिक्षिका, उनकी शिक्षा नीतियों का भूलेगी कैसे भारत की बेटियां, ऋणी है जिनकी संकल्प शक्ति का जिनके जज़्बातो से, बल […]
लडकियों की पथप्रदर्शिका थी जो घर से निकल पाठशाला का रूख करवायी थी जो पति ज्योतिबा संग शिक्षा की अलख जगाने चली थीं जो तमाम बाधाओं पे पार पाते हुए, पहली पाठशाला बालिकाओं की खोली […]
बबीता मैम , बहुत सारे शिक्षकों का मुझे मार्गदर्शन प्राप्त हुआ परन्तु आपनें मुझे जीवन जीना सिखाया आपने । मैं तो कुछ भी नहीं थी परन्तु आपने मेरी सुप्तावस्था की क्षमताओ को उजागर किया आपने […]
तुम्हारी एक हंसी सारे गम भुलाती है, इस तरह हँसते रहो और खिलखिलाते रहो। गीत खुशियों के गुनगुनाते रहो जिंदगी को हंसीं बनाते रहो। बात ही बात में ढूँढो खुशियां, पलों को भोग, मुस्कुराते रहो।
टूट कर बिखरी नहीं, सांस है अभी थमी नहीं। थक चुकी है जीवन आशा , फिर भी लौ बुझी नहीं।
कभी पल-पल इबादत करते थे मेरी, अब किसी गैर की आयत हो गए।
मेरी शिक्षक मेरी मां ही तो है , सिखाया उसने चलना , बोलना और पढ़ना -लिखना। अर्थ न जाने कितने समझाएं । पूछो कितनी ही बार ;वह प्रश्न , फिर भी कभी ना डांट लगाए […]
दिया जब भी दिखाता हूँ मैं तुम सूरज दिखाती हो, निराशा में हमेशा हौसला मुझमें जगाती हो। बताओ ना कि इतना क्यों मुझे सम्मान देती हो, स्वयं की हर ख़ुशी को क्यों भला मुझ पर […]
तेरी खिड़की से झांकते बादल, तेरे हाथों में चलती कलम । बड़ी ही अद्भुत लगती हमें, कुछ लिखते ही रहते हो हरदम ।
कलम कहती है,बोल दूं, क्या राज़ दिलों के खोल दूं। “गीता” चाहे वो मौन रहे, नज़र लग जाती है, कौन कहे।
ए दोस्त —- जो इश्क़ में बदनाम होते है। दरअसल वही आशिक़ कामयाब होते है।।
झील में उतरने से पहले काश मैं गहराई को नाप लेता। अब दलदल में फंसता जा रहा हूँ काश कोई बचा लेता।।
हम उनके लिए “मीर”, बद से बदनाम होते गए। वो नादान मुझे इम्तहान पे इम्तहान लेते गए।।
उनकी आँखों से ,अश्क क्या गिरी। मैं समझा मुझ पे, बिजली गिरी।।
मारकर फूल मत समझो कि हम संतुष्ट हैं। मुस्कुराओ अन्यथा हम रुष्ठ हैं। क्या करें मासूमियत से आपकी, ये चिढ़ाते नैन क्या कम दुष्ट हैं।
देखता हूँ मैं जब भी आईना महसूस करता हूँ, कमी खुद मुझ में है तुझको यूँ ही बदनाम करता हूँ।
मिटा देना मसल कर तू मेरी हस्ती को जूते से, चींटी हूँ नन्हीं सी क्या पता डंक मारूंगी। मेरे जीने का हक बस तू इसी चिन्ता में खा लेना कि चींटी हूँ जरा सी क्या […]
बहुत देर से ही सही मगर, समझ में आया, मगर से हो तुम, मेरे झील से जीवन में।
‘हाँ मैंने उसको रोका था, फिर भी वो चौखट लाँघ गई.. जैसे बस जागने वाले तक, हो इस मुर्गे की बाँग गई.. बाकी सब निष्फल सिद्ध हुआ, हम क्या थे वो कल सिद्ध हुआ.. उस […]
जहाँ संघर्ष दिखता है, वहां पर कूद जाता हूँ। यहीं पर हूँ गलत मैं लक्ष्य पाने जूझ जाता हूँ। हृदय है कोमल कवि कलम है सत्य लिखता हूँ, नए उत्साह का संचार हो नवगीत लिखता […]
महज़ ख़्वाब देखने से उसकी ताबीर नहीं होती ज़िन्दगी हादसों की मोहताज़ हुआ करती है .. बहुत कुछ दे कर, एक झटके में छीन लेती है कभी कभी बड़ी बेरहम हुआ करती है … नहीं […]
चर्चे मेरे तुझे मिलते होंगे पर मैं ना मिलता तूने शोरत को चाहा था और मैंने खुदाई तुझ मे
शिक्षक दिवस की हार्दिक बधाई | कविता- ज्ञान दाता | ज्ञान दाता विज्ञान दाता तुम ही हो | हे गुरु प्रकाश दाता मुक्ति दाता तुम ही हो | जीवन मे अंधेरा बहुत था तुमसे पहले| […]
सावन की रिमझिम बूंदों में, भीगे तुम भी, भीगे हम भी भीग गया है तन – मन सारा। नभ से मेघा जल बरसाते, धरती को हैं सरस बनाते गीले हैं आगे के रस्ते। अरे! अरे, […]
आज पकड़े गए तुम कन्ह। माखन चुराते हुए,’ माखन खाते हुए।। रोज़ खीजते हो तुम रोज़ सताते हो । नटखट बड़े हो तुम कान्हा.🌹……….।। हाथ नहीं आते हो माखन चुराते हो🌷। माखन खाते तो तुम […]
हास्य- कविता सत्य – नारायण जी की पूजा थी, शर्मा जी के धाम। गुप्ता जी भी पहुंच गए, छोड़ के सारे काम। आरती के समय सामने, जब थाली आई, डाला दस रुपए का फटा नोट, […]
बिन बुलाये मेहमान हैं हम जब कहोगे तब चले जायेंगे। घर आपका है, हम खुद का समझ बैठे थे, आपको अपना समझ बैठे थे।
कड़वे बोल सुन सुन कर, तेरे, मैं हो गया पागल। है ऐसा क्या कि तब भी, मैं तेरा सम्मान करता हूँ।
मान हैं सम्मान हैं देश की जान हैं। आम नहीं खास नहीं राष्ट्र निर्माता हैं शिक्षक। नाक से नेटा टपक रहा था। आंसू का कतरा लुढक रहा था। बाहुपाश में भरकर जिसने अपनाया वो मेरे […]
मैं शिक्षक हूं वर्तमान का, मुझे बच्चों से डर लगता है, मजबूर-सा हूं पढ़ाने में, बेरोजगारी से डर लगता है। सम्मान-वम्मान जुति बराबर मगर लाचारी से डर लगता है, अध्यापन ही एक काम नहीं अतिरिक्त […]
गुरू की महिमा का मैं, कैसे करूं बखान । गुरू से ही तो किया है, ये सब अर्जित ज्ञान। ऐसा कोई कागज़ नहीं, जिसमे वो शब्द समाएं। ऐसी कोई स्याही नहीं, जिससे सारे गुरू – […]
हे गुरूवर करूँ आपका अभिनन्दनम् सानिध्य आप सबो का पाके बन जाऊँ मैं चन्दन शिक्षक दिवस पर सभी गुरुजनों का हार्दिक बधाई!
गुरु अर्चना ,गुरु प्रार्थना ,गुरु जीवन का आलंबन है गुरु की महिमा ,गुरु की वाणी जैसे परमात्मा का वंदन है प्रेम का आधार गुरु है ,ज्ञान का विस्तार गुरु है भविष्य का निर्माण वही है […]
तेरे शहर मे शोर बहुत है कोई अपना नहीं मेरे गाओं मे लोग कम है पर सब आपने है
नहीं होती है रात , सिर्फ सूरज के डूबने से। रात तब भी होती हैं , जब उम्मीद नहीं, दिखती…तुम्हें पाने की।
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