मिठाई की दुकान से कुछ दूर, एक निर्धन बालक को मैंने कुछ सिक्के गिनते देख लिया हां, मैंने उस बालक की आंखों में, एक सपना पलते देख लिया चाह उसे भी होती होगी, नए वस्त्र […]

वो दूर तक फैला नीला आसमां, सांझ हो रही है,अब तो आजा ना ये लम्हे बिताऊं तुम्हारे साथ, आजा ना, करते हैं कुछ देर बात देखती हूं राह, तेरी इंतजार में *****✍️गीता

दीवाली की धूम मची है, रौनक है बाजारों में लेकिन तुम भूल ना जाना, सुन्दर-सुन्दर दिए बनाए अपने देश के कुम्हारों ने दिए मोल ले कर उनसे तुम, उनका भी पर्व मनवा देना महीनों मेहनत […]

पटाखे नहीं जलाना इस बार, ये नियम अपनाना इस बार पवन प्रदूषित हुई हिन्द की, सांस सुलभ ना आएगी दीवाली का पर्व दोस्तों, बस दीपों से रौशन हो इस बार श्री राम जी के अवध […]

भाग्य कहाँ ले जाता है और कहाँ मैं जाती हूँ ! प्रीत के बदले प्रीत लुटाती प्रीत नहीं मैं पाती हूँ.. जीत सके जो मेरा मन किसी में ऐसी बात कहाँ ! तुझे छोंड़ मैं […]

धून्ध है चारों तरफ़ रास्ते की खबर नहीं जाऊँ तो जाऊँ कहाँ आती मंजिल नज़र नहीं । फिक्र अब कहाँ ये जहाँ मिलें निन्द है कहाँ जो स्वप्न नया खिले बढ सकूँ जहाँ कोई ऐसी […]

हम उस मुकाम पर है जहाँ जिम्मेदारियां सर चढ़ बोलती हैं काम के बोझ तले दबी जिन्दगी, नयी चीजों को सीखने की प्रवृत्ति उदासीन होती है पर मेरी उत्कंठा नित नयी चीजों को सीखने की […]

गर पढ़ते हो जिस्म मेरा तो सुन लो क्या तुम इस लायक हो! दर्द दिया करते हो मुझको चैन नहीं आने देते पढ़ते हो बस रूप मेरा कभी रूह में क्यों नहीं झांकते ! हाँ, […]

पटाखे ना जलाओ मित्र दीपों को जलाओ अपने मन के अन्धकार को मिटाओ राम आये अवध में तो हे देशवासियों ! अपने क्षेत्र को दीपों से सजाकर दीपावली मनाओ पटाखे जलाने से होता है प्रदूषण […]

माँ बाप को दु:ख न देना उसने ही तुम्हें चलना सिखाया जिस पैर पर चल कर तुमने कामयाबी हासिल की उसी पैर पर उसने कभी अपनी जान न्योछावर किया । हंसना सिखाया बोलना सिखाया आज […]

अरे ओ रोशनी क्यों टिमटिमाती हो, क्यों इस तरह से दर्द में खुद को रुलाती हो। समझ लो तुम स्वयं को एक अदभुत शक्ति हो मत रहो दुविधा में तुम तो वाकई में शक्ति हो। […]

पहले रहती थी खिलखिलाती मुस्कुराती मैं कली फिर आया एक भंवरा मेरे सम्मुख हे अली ! पी लिया उसने मेरे जीवन का सारा रस अली मुस्कुराती कली फिर सिसकते हुए रोने लगी मेरे जीवन की […]

खट्टी मीठी यादों से आज उस बेवफा की तस्वीर बनाई। दिल में आ कर देखिए दूर हो गया आज सनम हरजाई।। अक्सर मैं सुना करता था प्यार में रब बसता है। गर रब बसता है […]

दीवाली आ रही है फुटपाथ में भी, नंगे -धड़ंगे, भूखे, ठिठुरते सोचते हैं कल हम गुब्बारे बेचेंगे। एक दस बरस के नन्हें के बापू ने गुब्बारे खरीदने को दस रुपये दिए हैं। दस के गुब्बारे […]

हवा से कहूँ जा खबर ले के आ जा, किस तरह से उनके दिन कट रहे हैं। दिवाली में कैसी शोभा है उनकी किस तरह से उनके बम फट रहे हैं। हवा तू जरा सा […]

जो बंदे बकरा-मुर्गा काट छौंककर खाते हैं वो मानुष भगवान के घर में उल्टा लटकाए जाते हैं निर्जीवों का तो इस जग में कोई मान नहीं क्या जीवित जीवों में भी कोई जान नहीं ? […]

अब मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी 8 महीनेहो गई है कुछ जिद्दी, कुछ नकचढ़ी हो गई है अब मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी 8 महीने हो गई है अब अपनी हर बात मनवाने लगी है हर दिन नई – नई […]

मेरी सबसे 👌अच्छी दोस्त मेरी माँ है, मेरी माँ को 🎂 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ 🎉🎈 ! माँ मुझे नहीं पता कि मैं आपके बच्चे के रूप में कितनी भाग्यशाली हूं, लेकिन मुझे ये पता […]

वो छोटे-छोटे मासूम से थे कमरे में मेरे बैठे थे मैं गई रात को देर से थी उस समय थोड़ी-सी सर्दी थी फिर देखा मैंने उनको तो मन में हमदर्दी जाग उठी वह सिकुडे़-सिकुड़े बैठे […]

सड़क किनारे बैठ कर, वो कपड़े सिया करता है सर्द हवा का झोंका, उसको भी दर्द दिया करता है कभी जलाकर आग, बदन ताप लिया करता है ये सर्दी का मौसम, उसको भी संताप दिया […]

मन कभी छोटा न करना दैव पर विश्वास रखना, गर कभी मुश्किल समय हो टूटना मत धैर्य रखना। जिन्दगी में मुश्किलें लाखों मिलेंगी आपको, मुश्किलों में, ठोस बनकर झेल लेना धैर्य रखना। गर कभी आंखों […]

लोकतंत्र की जन्मस्थली, लक्ष्वीगणतंत्र जहाँ थी बसी, प्रलोभन नहीं जहाँ बस काम, विकास, आत्मसम्मान की, विजयगाथा पुनः सुनने को मिली।। जहाँ फिर से कर्मयोगी की बयार हर ग्राम, कस्बे, टोले से उठी सारे अनुमान व्यर्थ, […]

रात अंधियारी थी उसमें चाँद सी तुम साथ थी, साँस उलझन में भरी थी, क्या पता क्या बात थी। चाहते थे खूब कहना बोल पाये थे नहीं, अश्क आये थे उमड़ हम रोक पाये थे […]

मैं पैदा हुआ तो था कुछ अजीब फूटा हुआ था मेरा नसीब शंकर-पार्वती का मिश्रित रूप हूँ मैं चुप रहो अर्धनारीश्वर हूँ मैं बचपन से ही मेरे साथ भेदभाव होता था शीशे को देखकर मुस्कुराता […]

भोजपुरी सरस्वती वंदना – मईया दया कईदा | रात दिन मईया तोहरे नामवा के जापी , हमपे दया कइदा | तनी देतु दर्शनवा मईया दया कइदा | रात न चयन पड़े दिन ना चयनवा | […]

वो उठा ले झाडू तो सबकी शामत आ जाती है मेरे पूरे दिन की मेहनत ना रास किसी को आती है हाथ में उसके पानी पकड़ाओ तब वो मैडम पीती हैं उम्र में हैं मुझसे […]

यूं नजरों से ना देख मुझे रूह में झांक कभी मैं क्या हूँ उसका परिचय तू पाएगा तभी रूप तो मेरा उजला-उजला बस दिल थोड़ा-सा काला है बता रही हूँ तुझको नजरों से क्योंकि तू […]

जब भी होती हूं उदास, बहुत याद आती हो मां याद आती हैं बचपन की बातें, मेरे लिए जागती, तुम्हारी रातें याद आता है…. तुम्हारा नई-नई बातें सिखाना, कभी गुस्से से डांटकर, वो चुपके से […]

सब मुझे देख रहे थे ऐसे जैसे मैं कोई चीज बिकाऊ कुर्सी, मेज खरीदने जैसे वो कर रहे थे भाव-ताव क्या मेरा कोई स्वाभिमान नहीं क्या मैं कोई इंसान नहीं लड़कियों का इस देश में […]

इक इन्तज़ार में रहे कोई अपना हमें प्यार करें हमें जाने समझें हमसे हमारी अच्छाइयों का इज़हार करें! दुख से भागते रहे सुख का दामन थामने चले एक नयी खुशी की तलाश में भागते दौङते […]

सब मुझे देख रहे थे ऐसे जैसे मैं कोई चीज बिकाऊ कुर्सी, मेज खरीदने जैसे वो कर रहे थे भाव-ताव क्या मेरा कोई स्वाभिमान नहीं क्या मैं कोई इंसान नहीं लड़कियों का इस देश में […]

चलो एक नये कोने की तलाश करें उदासियो को हटा, सोंच में बदलाव करें । खुद को नये सिरे से गढ़े अबतक खुद के लिए जीते रहे अपने लिए त्योहार मनाते चले अब एक नयी […]

मैं हमेशा दुःख से कतराती रही, इसे दुत्कारती रही मगर ये दुःख हमेशा ही मिला है मुझसे बाहें पसारे…!! मैं भटकती रही चेहरे दर चेहरे सुख की तलाश में… और वो हमेशा रहा एक परछाई […]

माँ मुझे बुला लो कुछ दिन अपने पास यहाँ कुछ भी अच्छा नहीं लगता प्यार तो सब करते हैं पर फिर भी कुछ नहीं जचता गोल-गोल रोटियां बनाकर तू मुझे जबरदस्ती खिलाती थी बुरा लगता […]

कविता- डॉक्टर साहब ——————————- देखिए डॉक्टर साहब जी, बेटा क्यों अब रोता हैं| रात अंधेरी काले बादल, रिमझिम बरसा पानी था, हाय पिताजी प्रेम तुम्हारा, कितना अद्भुत अच्छा था, देखा हमकों रोतें जैसे, रख कंधे […]

प्यार दूर की बात सम्मान कभी सपने में भी ना सोचूं तुम तो देखने से भी कतराए देख कर नज़र फेर ली फिर कहते हो मेरी दुआओं मे बड़ी ताकत हैं जल्दी कबूल हो जाती […]

गरीब के घर में झांकीए कैसे मनाते है निर्धन दीवाली। मन में उमंगों की पटाखे फोर कर निर्धन ऐसे मनाते है दीवाली ।। दीया है बाती है मगर तेल नहीं लाला भी आज उधार देगा […]

हम सब दीप तो जलायेंगे, बाहरी अंधेर को दूर करने के लिए। मगर हम वो दीप कब जलायेंगे मन में छिपे अंधेर को दूर करने के लिए।। हम हर वर्ष बड़ी उल्लास के साथ घर […]

दिल में छुपा एहसास हो तुम ऱब से भी ज्यादा खास हो तुम.. हमारे बीच है मीलों तक की दूरी पर साँसों से भी ज्यादा पास हो तुम.. कड़वा है ये सारा जग हमदम पर […]

कविता-खिलौना मत बनाना ————————————– हे कुम्हार, मत बना खिलौना हमें, जमाना खेलें , तोड़ के, मिटा दे मेरी हस्ती को, बेचे किसी बाजार में, कोई खरीदें मुझे, बाजार की सबसे सस्ती वस्तु समझ, मिट्टी से […]