मधुमालती छंदाधारित कविता – शीर्षक – मन (कुल 14 मात्रा, विन्यास 2212, 2212) ******************* मन फूल सा, कोमल न हो, पर ठोस हो, तो बात है। मन ही न हो, तब आदमी, क्या आदमी, है […]

रखना लगाव खोलकर के द्वार दिल के तुम। जितना वो दे उससे भी अधिक प्यार देना तुम। कभी किसी दुखी का दर्द मत बढ़ाना तुम, जरा सा नेह देना और गम मिटाना तुम। चूमो शिखर […]

ओ कवि, जरा सम्भल कर लिखना यह कविता नही परछाई है तेरी आत्मा का प्रतिरूप यह तेरे अन्दर छिपी भावनाओं की प्रतीक है अच्छे या बुरे उजागर हो जाओगे फिर दुराव- छिपाव ना रख पाओगे […]

मेरी अभिलाषा को थोड़ा-सा उङान दे दो हे तात! मुझे मेरी पहचान दे दो कबतक भटकती रहेगी मेरी आत्मा यूँ करते रहोगे, कहाँ तक मेरा खात्मा मुझको मेरा, खोया मुकाम दे दो मेरे हौसलों को […]

हो गई है भोर, गुनगुनी सी धूप है, ना व्यर्थ का कोई शोर बदल रहा है मौसम, तुम ना बदल जाना अच्छा लग रहा है, सर्दी का यूं धीरे-धीरे आना *****✍️गीता

सुबह हो रही है, घौंसले से बाहर आने को आतुर चिड़िया ने पंखों को भुरभुराया, सहलाया, मानो योग कर रही हो, गर्दन इधर की, उधर की फुर्र उड़ी अपने दैनिक कार्य निपटाने चली। समय की […]

शत-शत नमन उस जन-नायक को लोकनायक से जाने जाते थे भारत-रत्न से सम्मानित, इंदिरा विरोधी कहलाते थे । आज जन्म दिवस है उनका हम नतमस्तक हो जाते हैं विमल प्रसाद जिन्हें “मानव पिता” कह जाते […]

तुम्हें खोने का डर एक अनजाने,अनचाहे मुकाम तक पहुंचाएगा खुद को वही रोक लेती अगर मालूम होता हस्र न होता यह अपना । नीचे गिर कर संभलना सीखा था हमने खुद की नजरों से गिरकर […]

इंतज़ार ये नन्हा सा पौधा, जो फूट निकला है धरती की गोद से, कितना नाज़ुक है ये कितना सौम्य,कितना पवित्र, किसी नन्हे बच्चे की तरह आंखें खोलता,बंद करता अपने आस पड़ौस दूसरे पेड़ पौधों को […]

क़भी कोख़ में ही मार डाला उसे, कभी काट के फेंक दिया खलिहानों में!! कभी बेंच दिया उसे देह के बाज़ारों में , क़भी सरेराह नोचा सड़कों और चौराहों पे!! जब जी चाहा पूजा देवियों […]

कभी कभी मेरे मन के अंधेरे कमरे में न जाने किस झरोखे से चले आते हैं जुगनुओं से झिलमिलाते विचार…!! मैं अपना हाथ बढ़ाकर कोशिश करती हूँ उन्हें छू लेने की और वे छिटककर आगे […]

कविता -वर्ष पुरानी ————————– आज अचानक, कुछ खोज रहा था, कई वर्ष पुरानी कॉपी मिलती है| मैं साफ किया उसे, फिर खोल उसे पढ़ने लगा, पढ़ते-पढ़ते, मै रोने लगा| उसमें पड़ा गुलाब संग एक खत […]

दर्द का जो स्वाद है, उससे दिल आबाद है, मुफ्त है जग में, खुदगर्जीया ! मक्कारियां सरेआम है, दर्द का जो स्वाद है, उससे दिल आबाद है। मदहोशियों का माहौल हैं बहरूपियों की यहां फौज […]

अंधेरे में घिरा आकाश ठीक वैसा जैसा खुद पर न हो विश्वास। तारामंडल का टिमटिमाना ठोस निर्णय ले न पाना, ठीक एक जैसा है, अपनी बात पर स्थिर न रह पाने जैसा है। कदम उठाना […]

नित नए विवादों से तंग आकर क्या निकल पङू परसकून की तलाश में । काश कोई करी मिल जाए करार की दस्तखत कर सकें, हर उस मसौदे पर जिसपर सुकून का,आखिरी इकरारनामा अंकित हो अदला-बदली […]

बनी बनायी राहों पर चलते-चलते भूल गयी खुद को, औरों की सुनते-सुनते । ज़मीर जिसकी गवाही न दे, क्यूँ बढे अबूझ चिन्हों पर अच्छी बनकर, खुद से लङकर, सह गयी डरते-डरते । अपमान का विष, […]

धीरे-धीरे चुपके चुपके पड़ रही है साँझ हम भीतर ही थे पता ही नहीं चला कि कब आई दबे पांव साँझ। अभी तो उजाला था, चहक रही थी चिड़ियाएं, दिख रही थी चारों ओर के […]

आज तुम्हारी मुस्कुराहट में वो बात दिख रही है, जिस पर लिखने को कलम – कागज लिए हजारों हाथ भी काँपते हुए, घबराते हुए असहाय होकर, नहीं लिख पाते हैं, सीधी कविता। असहाय हाथ, उलझी […]

अहो, कविता!! तुम तो बहुत ही खूबसूरत हो, सजाकर भाव रसना से मधुर अभिव्यक्ति करती हो। जीवन का सुख व दुख सब कुछ समेटे हो स्वयं में तुम, समझ संवेदनाओं को विलक्षण रूप देती हो। […]

कविता- विरह वियोग —————————— अब हम किससे अपना दर्द कहे, कहां हम जाएं की- अपने दर्द की दवा मिले| जब भी चेहरा याद आता है, शृंगार रस के सपनों में डूब जाता हूं, जैसे ही […]

जब कविता लिखने का कोई मूड नहीं बन पाता है मार सुड़ुप्पा चाय का प्यारे ! ये दिल आशु कवि बन जाता है दो-तीन कपों में मैं तो पूरी कविता लिख लेती हूँ पाँच कपों […]

दस अक्टूबर है आज जीवन के लिए है खास विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस है आज थोड़ा जगाना होगा समाज। जिस तरह जरूरी है तन का स्वस्थ और सुडौल रहना, ठीक उसी तरह तरह जरूरी है […]

तेरी तस्वीर को व्हाट्सएप पर देखा आज मैंने कई सालों बाद वो दौर याद आ गया जब हम रात-रात भर बातें किया करते थे उन होंठों से काफी पुराना रिश्ता रहा है मेरा जो तस्वीर […]

तिल-तिल के जलना, मिलना -बिछङना कुछ नया तो नहीं रोज की बात है । जैसे दिनकर का जाना, संध्या का मुस्काना, गगन धरा के मिलन का भरम कुछ नया तो नहीं रोज़ की बात है […]

मर के भी ना खत्म हो वो जुनून है इश्क जी कर जो अधूरी रह जाए वो कहानी है इश्क तेरे-मेरे दर्मियां जो रिश्ता है उसका नामोनिशान है इश्क बीच की खिड़की खोलकर जो बातें […]

छोटा सा बीज पीपल का बड़ा सा पेड़ बनकर हजारों वर्ष तक प्राणवायु देता है जिसे पूजकर हर कोई हुमायूं होता है। इसी तरह न समझो कि छोटा कभी बड़ा नहीं बनता है बल्कि मौका […]

छोंड़कर शिकायत बस शुक्रिया अदा करती हूँ जितना है पास बस उसी का मजा लेती हूँ जिधर से भी निकलती हूँ मीठी मुस्कुराहट बिखेरती हूँ जिन्दगी के हर दौर का मजा लेती हूँ अश्क देख […]

किसी गरीब की कभी मदद न की हो तो आज ही कीजिए, टेंशन न लीजिए देर मत कीजिये खुदा के वास्ते कुछ दान-धरम कीजिये। खुदा भले ही न दे इसके बदले में तुम्हें, मगर अब […]

मुहब्बत में कभी-कभी, घर छूटते हैं मुहब्बत में अक्सर ही, दिल टूटते हैं दोस्ती की देखो, निराली ही शान है दोस्ती के सिर पे, ना कोई इल्ज़ाम है मुहब्बत के मैं, विरुद्ध नहीं, बशर्ते मुहब्बत […]

जरा कम ही शोर मचाया करो क्योंकि मैंने अक्सर शोर मचाने वालों को भीड़ का हिस्सा बनते देखा है जिनका स्वयं का कोई अस्तित्व नहीं होता है सिर्फ दूसरों का अनुसरण करते हैं खुद की […]

भरी बरसात है फिर भी कलम से प्यास लिखता हूँ, समर्पित हो मगर फिर क्यों वहम को पास रखता हूँ। नजर पर रख कोई पर्दा हमेशा पाप करता हूँ, यहीं पर हीन हूँ मैं बस […]

मुहल्ले में खड़े टावर में सुनकर कांव कव्वे की, सभी यह सोच कर खुश हैं अब मेहमान आयेगा। मगर वह पाहुना आयेगा किसके घर किसी को भी पता कुछ है नहीं केवल भरोसा है कि […]

इन्सान नहीं कुछ बोलता वक़्त हैं बोलता बंदा कुछ नही हालातों से घिरा हुआ यह दिल है कुछ भरा हुआ काफिला खट्टी-मीठी यादों का छलकता पैमाना खुशियों का दर्द भरे जज़्बातों का समेटे कुछ आम […]

डेविड बेरी,जेलर था सैल्यूलर जेल का डेविड बेरी को “बैरी” कहते थे , सारे हिन्द के सैनानी । उसके किए की भी , क्या ख़ूब सज़ा मिली ये जानें सारे हिन्दुस्तानी । आज़ाद भारत जब […]

समर्पण:- जबरदस्ती या प्यार कोने में दुल्हन बनी मै खड़ी थी, हाथों में सिंदूर की डिबिया पड़ी थी, वक्त था मेरे घर से विदा होने की, छोड़ सब सखियां को जाने की बेला हो चली […]

ना जाने कितनी परीक्षाओं से गुजरना पडे़गा आखिर और कितना पिसना पडे़गा नसीहत सब देते हैं पढ़ने की अब नौकरी के लिए क्या किताबें घोलकर पीना पडे़गा अरमां हैं आसमान छूने के पर हकीकत की […]

सिक्किम के सौन्दर्य का, मैं कैसे करूं बखान वहां से लेकर हम यादें, आए अद्भुत, आलीशान स्वर्णिम सूर्य उदित होते हैं, पर्वतों के पार बनते बादलों की छटा है, सुन्दर अपरम्पार झरने झर-झर बहें यहां […]

वो एक कप कॉफी का वादा तुम्हें याद होगा रोज़ मिला करते थे तुम मुझसे उसी वादे की खातिर कहना चाहते थे मगर कह नहीं पाते थे कि चलोगी मेरी बाइक की बैक सीट पर […]

वो एकतरफा प्यार ,जिसके लिये हुआ दिल बेक़रार मैं ढूंढता रहा उसे ,होकर बेक़रार उसका मुस्कुराना देखकर आँखों का झुकना देखकर उसके आगे लगने लगे महखाने सारे बेअसर वो जाते जिधर जिधर मैं पहुंचता उधर […]

तुम्हीं बताओ कैसे एक नयी शुरुआत करें, तुझे जानकर भी फिर से तुझपर कैसे इन्तिखाब करें । जिनकी फितरत रही हैंअकसर ताश के पत्तों की तरह, जिनकी बातें जल में उठते बुलबुले की तरह , […]

उम्र और जिंदगी में फर्क:- —————————— उम्र वो है दोस्तों जो बीते अपनों के बिना, ******************************* जिंदगी वो है जो अपनों के साये में गुजरती है|

मैंने गुस्से से उसे देखा उसने भी गुस्से से देखा मैंने आँखें दिखाईं वो भी आँखें दिखाने लगा मैं तंग आकर हँसने लगी तो वह भी खिलखिला उठा मैं मुस्कुराई वह मुस्कुराया मैं इतरायी वह […]

भीम पार्टी आई देखो भीम पार्टी आई दलित को गोद में लेकर खुद को नेता समझे भाई वह कहती है ब्राह्मण, ठाकुर और तलवार इनको मारो जूते चार और सभी प्यारे बंधु दलित पर हो […]

गैया तुम तो मैया हो है दूध अमृत तुम्हारा जीने एक सहारा जिससे पोषित होता है मन और शरीर हमारा। हर तरह काम आती हो जीना हो या मरना हो हर जगह जरूरत पड़ती शुभ-अशुभ […]

कहीं भ्रूण हत्या बेटी की, कहीं पर हुआ बलात्कार है कहीं एसिड अटैक सुना और कहीं दहेज़ की, सही मार है गर यूं ही चलता रहा तो, भारत में भगवान भी बेटी ना देंगे पैदा […]

अरे भाई,चुनाव का वक़्त आया है , क्या करना है? कुछ भी करो, धर्म-धर्म खेलो, जाति-जाति खेलो, औरत संग अनाचार करवा लो, हर दुखती रग पर नमक डालो, बस चुनाव नही हारना है।