*अभिनंदन नव वर्ष तुम्हारा*

नए वर्ष की नई भोर है
स्वर्णिम-उजियारा चहुं ओर है
चेहरे चमके बगिया महकी
ओस सुबह की फिर से चमकी
उपवन में फिर फूल खिलेंगे
बिछड़े दिल भी आज मिलेंगे
सुंदर है कुदरत की चित्रकारी
क्या जंगल क्या पर्वतों की बर्फबारी
सागर की लहरें भी प्यारी
करती मीठा शोर है
स्वर्णिम उजियारा चहुं ओर है
है उल्लासित जग सारा
दूर होगा सब अंधियारा
खुशियों का लाएगा पिटारा
अभिनंदन नव वर्ष तुम्हारा
______✍️गीता


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15 Comments

  1. Geeta kumari - January 1, 2021, 8:01 am

    आप सभी को नव वर्ष की बहुत-बहुत शुभकामनाएं

  2. Anu Singla - January 1, 2021, 8:07 am

    बहुत खूब
    नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें

    • Geeta kumari - January 1, 2021, 9:04 am

      बहुत-बहुत धन्यवाद अनु जी
      आपको भी नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

  3. Sandeep Kala - January 1, 2021, 12:17 pm

    नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ व बधाई

    • Geeta kumari - January 1, 2021, 1:19 pm

      नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं संदीप जी

  4. Pragya Shukla - January 1, 2021, 3:56 pm

    वाह बहुत सुंदर लिखा है आपने

    • Geeta kumari - January 1, 2021, 7:57 pm

      बहुत-बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी
      नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

  5. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - January 1, 2021, 7:36 pm

    अतिसुंदर भाव
    बहुत बहुत मुबारकबाद नये, साल की

    • Geeta kumari - January 1, 2021, 7:58 pm

      बहुत-बहुत धन्यवाद भाई जी
      आपको भी नए वर्ष की बहुत-बहुत शुभकामनाएं🙏

  6. Pragya Shukla - January 1, 2021, 8:25 pm

    एक एक शब्द स्वर्ण है

    • Geeta kumari - January 1, 2021, 8:28 pm

      इतनी सुन्दर समीक्षा…. ह्रदय तल की गहराइयों से धन्यवाद प्रज्ञा

  7. vivek singhal - January 1, 2021, 8:40 pm

    वाह दी,,
    आपको भी शुभकामनाएं
    यह कविता आपकी बहुत अच्छी है

    • Geeta kumari - January 1, 2021, 9:09 pm

      बहुत-बहुत धन्यवाद विवेक भाई
      आपको भी नव वर्ष की बहुत-बहुत बधाई

  8. Satish Pandey - January 1, 2021, 9:21 pm

    है उल्लासित जग सारा
    दूर होगा सब अंधियारा
    खुशियों का लाएगा पिटारा
    अभिनंदन नव वर्ष तुम्हारा”
    —– बहुत सुन्दर रचना, उम्दा शिल्प, बेहतरीन काव्य सौष्ठव है गीता जी, लेखनी में निरंतर प्रखरता। वाह

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