ऐ बेदर्द सर्दी! तुम्हारा भी कोई हिसाब नहीं

ऐ बेदर्द सर्दी ! तुम्हारा भी कोई हिसाब नहीं।
कहीं मंद शीतल हवाएँ ।
कहीं शबनम की ऱवाएँ ।।
दिन को रात किया कोहरे का कोई जवाब नहीं।
ऐ बेदर्द सर्दी ! तुम्हारा भी कोई हिसाब नहीं।।
कोई चिथड़े में लिपटा ।
कोई घर में है सिमटा ।।
कोई कोट पैंट में भी आके बनता नवाब नहीं।
ऐ बेदर्द सर्दी,,,, ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,।।
रंग बिरंगे कपड़ों में बच्चे ।
आँगन में खेले लगते अच्छे ।।
दादा -दादी के पहरे का कोई हिसाब नहीं।
ऐ बेदर्द सर्दी ! तुम्हारा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,।।
रंग -बिरंगी फूलों की क्यारी।
पीले खेत सरसों की न्यारी।।
मटर मूंगफली गाजर के खाने का कोई जवाब नहीं।
ऐ बेदर्द सर्दी…………………………………………………।।
खोज रही है धूप सुहानी ।
जड़-चेतन व सकल प्राणी।।
एक सहारा जिसका सबको ऐसा कोई लिहाफ नहीं।
मन की गर्मी रख “विनयचंद ” ऐसा कोई ताव नहीं।।
ऐ बेदर्द सर्दी!…………………………………………………।।


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Related Posts

24 Comments

  1. देवेश साखरे 'देव' - December 11, 2019, 5:36 pm

    सुन्दर

  2. Amod Kumar Ray - December 11, 2019, 9:15 pm

    अति सुन्दर

  3. Nikhil Agrawal - December 11, 2019, 10:00 pm

    Vry gud

  4. Jha Bhardwaj - December 12, 2019, 6:34 am

    Kamal hai
    Kavita bemisaal hai

  5. BHARDWAJ TREKKER - December 12, 2019, 6:42 am

    बहुत ही सुंदर कविता है

  6. Ramesh Agrawal - December 12, 2019, 11:40 am

    Wow

  7. Pragya Shukla - December 12, 2019, 1:06 pm

    Good

  8. Poonam Agrawal - December 13, 2019, 9:16 am

    Nice

  9. Gopal jha - December 13, 2019, 11:16 am

    Previous collection mere yaar

  10. Nitisha Agrawal - December 14, 2019, 9:48 am

    Accha h

  11. Abhishek kumar - December 14, 2019, 5:56 pm

    सुन्दर रचना

  12. ajay kumar - December 15, 2019, 1:35 pm

    Bahut bahut badhiya kabita

Leave a Reply