कलम में स्याही

नि:शब्द हूँ निस्तेज मैं
मस्तिष्क के आवेश में
शब्द भारी पड़ रहे
कलम की स्याही से
नित यह कह रहे
ना उल्लिखित कर पाऊँगा
मैं तेरे भाव को
ना प्रकट मैं कर पाऊँगा
तो मैं क्यूँ लिखूं
मैं क्यूँ रखूँ अब
अपने कलम में स्याही??


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8 Comments

  1. महेश गुप्ता जौनपुरी - May 20, 2020, 7:26 pm

    वाह बहुत सुंदर

  2. Abhishek kumar - May 20, 2020, 8:52 pm

    बहुत अच्छे शब्द

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - May 20, 2020, 8:58 pm

    Nice

  4. Dhruv kumar - May 22, 2020, 9:31 pm

    Nyc

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