किसे कदर देखेगा

कुछ ऐसा कर जाएंगे, सारा शहर देखेगा।
मेरे शहर का, अब हर एक बशर देखेगा।

मेरे सितारे भी चमकेंगे एक दिन यकीनन,
गुज़रूं जहां से, हर शख्स एक नज़र देखेगा।

कुछ कर गुजरने की ख्वाहिश है गर तुझमें,
तो फिर क्या शब और क्या सहर देखेगा।

चलना है ज़िंदगी, मुश्किलें हजार फिर भी,
तेरा ज़ुनून अब यह लंबा सफर देखेगा।

जिन्हें शक था ‘देव’ काबिलियत पर कभी,
आज वह भी हैरत से किस कदर देखेगा।

देवेश साखरे ‘देव’

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13 Comments

  1. राम नरेशपुरवाला - September 13, 2019, 1:28 pm

    क्या खूब लिखा है

  2. राम नरेशपुरवाला - September 13, 2019, 1:34 pm

    I like your all poems

  3. Poonam singh - September 13, 2019, 1:57 pm

    Very nice

  4. NIMISHA SINGHAL - September 13, 2019, 10:05 pm

    👏👏

  5. ashmita - September 14, 2019, 12:08 am

    Nice

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