कोई एक दीवाना

मुद्दत बाद ए दोस्त भेजा उसने मेरे नाम इश्क़ ए पैगाम।
गुजर गया वो जमाना कभी याद करते थे उनको सुबह शाम।।
न मै बेवफा थी न वो बेवफा था बेवफा था ए ज़ुल्मी जमाना।।
सोचा था मुकद्दर साथ देगा ए दोस्त निकला वह भी बेगाना।।
कुदरत के तमाशा तो देखिए मै कहाँ आज वो कहाँ
सूखे पत्तों पे मेंहदी के रंग चढाने चले है फिर कोई एक दीवाना।।


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6 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - May 5, 2020, 5:08 pm

    Nice

  2. Dhruv kumar - May 7, 2020, 11:24 am

    Nyc

  3. Pragya Shukla - May 8, 2020, 10:17 am

    Oooh

  4. Abhishek kumar - May 8, 2020, 1:36 pm

    Good

  5. Satish Pandey - July 12, 2020, 2:31 pm

    सराहनीय

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