ख्वाहिशों के बाजार

ख्वाहिशों के बाजार में आयी हूं
कुछ खरीदने की खातिर
मगर दाम ही इतने है हर ख्वाहिश के
कि खाली हाथ ही वापस चली, बन मुसाफ़िर


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11 Comments

  1. Praduman Amit - June 29, 2020, 1:38 pm

    ख्वाहिश के बाजार में ख़्वाहिश के दौलत ही आपको निराश नहीं करेगी। पंक्तियां अच्छी है।

  2. Pragya Shukla - June 29, 2020, 4:02 pm

    👌

  3. देवेश साखरे 'देव' - June 29, 2020, 11:32 pm

    वाह

  4. Abhishek kumar - July 10, 2020, 11:02 pm

    हैं। वाह

  5. Satish Pandey - July 11, 2020, 1:28 pm

    सुन्दर पंक्तियाँ,

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