ज़िन्दगी रंगीन हो जाता

कर गुज़रता कुछ तो, ज़िन्दगी रंगीन हो जाता।
जो किया ही नहीं, वो भी ज़ुर्म संगीन हो जाता।

मैं क्या हूँ, ये मैं जानता हूँ, मेरा ख़ुदा जानता है,
आग पर चल जाता तो, क्या यकीन हो जाता।

कुसूर बस इतना था, मैंने भला चाहा उसका,
काश ज़माने की तरह, मैं भी ज़हीन हो जाता।

तोहमतें मुझ पर सभी ने, लाख लगाई लेकिन,
ज़माने की सुनता गर मैं, तो गमगीन हो जाता।

नशे में जहाँ है, मैं भी गुज़रा हूँ, उन गलियों से,
सम्भल गया वरना, ‘देव’ भी शौकीन हो जाता।

देवेश साखरे ‘देव’

ज़हीन- intelligent,


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

16 Comments

  1. Pragya Shukla - December 16, 2019, 3:46 pm

    Good

  2. Abhishek kumar - December 16, 2019, 5:26 pm

    Nice

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - December 16, 2019, 7:46 pm

    अतिसुंदर

  4. Amod Kumar Ray - December 16, 2019, 9:17 pm

    सुन्दर

  5. Amod Kumar Ray - December 17, 2019, 9:43 am

    Nice

  6. Anil Mishra Prahari - December 19, 2019, 11:00 am

    बहुत खूब।

  7. Kanchan Dwivedi - March 7, 2020, 1:44 pm

    Nice

  8. Satish Pandey - July 13, 2020, 10:24 am

    वाह

Leave a Reply