झूठी है औरत

हां, झूठी है औरत,
अपनी ख्वाहिश तक ही नहीं सीमित,
औरों के लिए जगे रात तक
हां, झूठी है औरत।
मायके की तारीफ़ करे ससुराल में,
ससुराल की कमी ,ना बताए किसी हाल में।
कोशिश करती है , छिपा सकती है जब तक
हां …. बहुत झूठी है औरत ।
पति से कहे मेरा भाई दमदार है,
भाई से कहती पति शानदार है ।
यही तो करती आई है अब तक,
हां जी, … बहुत झूठी है औरत ।।

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Responses

    1. अरे सर 🙂….आपसे बढ़िया कहां जी।
      समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद जी 🙏।
      उत्साह वर्धन के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद ।

  1. बहुत सुंदर पंक्तियां
    वाकई में औरतों में झूठ बोलने की कला शानदार होती है।

    1. ये समाज पर एक तंज है। औरत मायके की इज्जत, ससुराल में और ससुराल की इज्जत मायके में रखती है।इस प्रकार दोनों परिवारों में सामंजस्य स्थापित करती है। घर में कोई अतिथि गैर तिमेभी सा जाए तो परिवार की इज्जत के लिए झूठ बोलती है कि में थकी हुई नहीं हूं, अभी फटाफट खाना तैयार हो जाता है….. आदि,आदि अनेकों उदाहरण मिल जाएंगे आपको।

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