तड़पती मोहब्बत

तड़पती मोहब्बत

हर पहर गुज़र जाता हैं
छूकर मुझे एक अन्जाना सा_

हम ज़िन्दगी थामकर तेरे ही
ख्वाबों को तराशते रहते हैं_

तु अन्जान सही मुझसे
ज़िंदा हैं पर साँसे मेरी ही तुझसे_

तुझे भूला सकुं पास
वो मेरे दिल नहीं_

माना तु ज़िन्दगी हैं मेरी
मगर ज़िन्दगी में मेरी हासिल नहीं_

-PRAGYA-

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5 Comments

  1. राम नरेशपुरवाला - September 10, 2019, 8:48 pm

    Oooooh

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 10, 2019, 9:23 pm

    क्या बात है बहुत सुंदर

  3. Poonam singh - September 10, 2019, 10:09 pm

    Nice

  4. NIMISHA SINGHAL - September 10, 2019, 10:13 pm

    Nice

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