“नाराज़गी” #2Liner-73

ღღ__ख़ुद से है, खुदा से है या तुझ से है “साहब”;
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जाने क्यूँ, इक नाराज़गी-सी रहती है आज-कल!!….‪#‎अक्स‬
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5 Comments

  1. Anirudh sethi - March 13, 2016, 11:26 am

    लाजबाव जनाब

  2. Ushesh Tripathi - March 13, 2016, 11:30 am

    Narajagi kisi se bhi ho par dard hmaesa aapko hi degi ……

    • Ankit Bhadouria - March 13, 2016, 4:21 pm

      खुश रहने के लिए भी अक्सर…..कुछ दर्द ज़रूरी होते हैं !!

  3. Pragya Shukla - April 19, 2021, 12:39 pm

    लाजवाब रचना

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