पाक़ दिल

लफ़्ज़ बिकते हैं इमान बिकते हैं जब बिकने पर आये तो क्या-क्या बिकते हैं ज़माने में__

एक पाक़ दिल पिन्हां सा हैं जो दुनिया की किसी दौलत से ना पिघलता हैं ना बिकता हैं गालिबन मैं मालामाल हूँ उस दौलत से__

-PRAGYA-

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4 Comments

  1. Antariksha Saha - August 19, 2019, 2:33 pm

    Bhaut khoob kaha apne

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